किशाऊ बांध परियोजना: फिर से बनेगी डीपीआर, सर्वेक्षण कार्य हुआ शुरू

प्रस्तावित 660 मेगावाट की किशाऊ बांध राष्ट्रीय परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) अब दोबारा तैयार होगी। परियोजना की लागत में संशोधन कर संशोधित डीपीआर तैयार करने के लिए कवायद शुरू हो चुकी है। एक सप्ताह से आधा दर्जन  इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीम प्रस्तावित बांध स्थल क्षेत्र में डेरा डालकर इस कवायद को आगे बढ़ा रही है। इस बहुउद्देश्यीय परियोजना का निर्माण हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर बहती टोंस नदी पर मोहराड़-शंबर में प्रस्तावित है।

पिछले वर्ष 24 नवंबर को हुई हाई पावर कमेटी की बैठक में परियोजना की डीपीआर को संशोधित करने पर फैसला हुआ था। वर्ष 2008 में राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित होने पर इस पर 10 हजार करोड़ रुपये की लागत अनुमानित थी। मौजूदा समय में लागत को बढ़ाकर 15 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस संशोधन के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी की मदद से हाइड्रोलॉजिकल डाटा संग्रहण किया जा रहा है। आईआईटी रुड़की की मदद से सिसमिक डिजाइन पैरामीटर स्टडी की जा रही है। इसके बाद ही 15 हजार करोड़ रुपये की संशोधित डीपीआर तैयार कर अंतिम रूप दिया जाएगा। इंजीनियर भानु मिश्रा ने बताया कि जो भी रिपोर्ट तैयार होगी वह जल्द प्रशासन को सौंप दी जाएगी।

236 मीटर होगी  बांध की ऊचाई 
बांध की ऊंचाई 236 मीटर है। इस बांध से 6 राज्यों की 97076 हेक्टेयर जमीन के लिए सिंचाई सुविधा मिलेगी। 660 मेगावाट बिजली तैयार होगी।

2950 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा बांध
किशाऊ बांध का कुल क्षेत्र 2950 हेक्टेयर है। हिमाचल में 1498 हेक्टेयर और उत्तराखंड की 1452 हेक्टेयर भूमि बांध के पानी में जलमग्न होगी। बांध के डूब क्षेत्र में हिमाचल के 8 और उत्तराखंड के 9 गांव आएंगे। दोनों राज्यों के 14 उपगांव भी विस्थापित होंगे।