हिमाचल: जिला परिषद और बीडीसी मेंबर्ज को करना होगा इन नियमों का पालन

जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब इसके बाद इनके अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा जोकि अप्रत्यक्ष रूप से होता है। इससे पूर्व सभी जीते हुए नुमाइंदों को शपथ दिलाई जाएगी जिसके लिए पांच दिन का समय दिया जाएगा। पांच दिन के भीतर सभी स्थानों पर इन नुमाइंदों को शपथ का सिलसिला पूरा कर दिया जाएगा जिसके बाद इनके अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चयन के लिए पहली बैठक बुलाई जानी है।

जो नियम कहते हैं उसके मुताबिक शपथ ग्रहण करने के सात दिन के भीतर पहली बैठक करनी अनिवार्य है और इस बैठक में ही अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चयन होगा। नियमों के मुताबिक इसमें दो-तिहाई कोरम की जरूरत रहती है और कोरम यदि पूरा नहीं होता है तो फिर अगले सात दिन में दूसरी बैठक बुलाई जाएगी। इसमें बहुमत में सदस्य बैठक में होने चाहिए तब वहां पर अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चयन होगा। मगर दूसरी बैठक में भी यदि वह सदस्य नहीं आते हैं तो तीसरी बैठक में उन सदस्यों को हटाने के लिए सरकार कार्रवाई शुरू करेगी। इसलिए पहली बैठक में नहीं तो दूसरी बैठक में सभी जिला परिषद सदस्यों व पंचायत समिति के चुने हुए सदस्यों का आना जरूरी होगा।

भाजपा व कांग्रेस दोनों दलों ने अपनी गोटियां बिठानी शुरू कर दी हैं। अप्रत्यक्ष रूप से जिला परिषद व पंचायत समिति यह दल अपने समर्थकों को अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की कुर्सी दिलाने को जोर लगाते हैं जिसका सिलसिला शुरू हो गया है। कांग्रेस ने अपने पर्यवेक्षक लगा दिए हैं वहीं भाजपा ने भी अपने नेताओं को जि मेदारी दी हे। भाजपा की तरफ से उसके मंत्रियों व विधायकों को यह जि मेदारी होगी जबकि कांग्रेस ने अपने उपाध्यक्षों व महासचिवों को यह जि मेदारी सौंपी है। देखना यह है कि अब किस दल के कहां पर अध्यक्ष व उपाध्यक्ष चुने जाते हैं जिनके साथ फिर दूसरे सभी नुमाइंदे होते हैं।

जिला परिषद व पंचायत समितियों को करोड़ों रूपए की ग्रांट विकास कार्यों के लिए दी जाती है और यह पैसा कैसे खर्च होगा इसमें अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की चलती है। वैसे जो बैठकें जिला परिषदों की होती हैं उसमें सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों को रखते हैं तभी उनको तय किया जाता है। बहरहाल यहां पर नियमों के अनुसार जिला परिषद व पंचायत समिति के गठन की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए सोमवार से काम शुरू हो जाएगा।