everlastingmemories

तुम हो तो हो ही, चाहे हम बात नहीं करते
खा़मोशियों में भी कभी जज़्बात नहीं मरते ।

दिल के झरोखों से हर पल निहारते हैं हम
भरी महफिल में चाहे मुलाकात नहीं करते ।

गरूर है, अदा है, शोखी है और जाने क्या
हुस्न की उठांऊ में अब और कितनी परतें ?

आंखें जो कह दें तो हौंठ चाहे ना भी खुलें
हर लम्हा कुछ कहता है, गुजरते- गुजरते ।

कजरारे नयनों ने है दिया नशा इस कद़र
बरसों ही लग जाएंगे, अब उतरते-उतरते।

© राजेश्वर सिंह ‘राजू’