सैर सपाटा करने निकली पर्यटकों की टोली क्षण में चट्टानों तले दफन

देवभूमि के दर्शन और वह भी इतने भयावह…किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। एनसीआर दिल्ली से निकली एचआर-53बी-9003 टैम्पो ट्रेवलर न केवल अपने टूअर के अंतिम पड़ाव पर थी, बल्कि नौ पर्यटकों समेत मिट्टी में ही मिल गई। वह कौन सा मनहूस पल था, वह किसकी आह थी, वह किसकी इतनी भयानक नजर थी कि सैर सपाटा करने निकली पर्यटकों की टोली क्षण में चट्टानों तले दफन हो गई।

देश के अंतिम गांव छितकुल को देखने की हसरत जीवन का ही अंतिम पड़ाव बन गई। किसी ने सोचा नहीं था कि वापसी का सफर बटसेरी गांव के छोर और बास्पा की सायं-सायं में ऐसा समा जाएगा, जिंदगी की वापसी ही नामुमकिन हो जाएगी।

बहुत कारुणिक, बहुत भयंकर था मंजर। न नजर टिक पा रही थी, न शरीर की कंपकंपी थम रही थी। ऐसा भयानक दृश्य था कि यह पता नहीं चल रहा था कि तोप के गोलों की तरह बरसी चट्टानों ने इतनी मजबूत टैम्पो ट्रैवलर को सड़क जैसा सपाट कर दिया था। पर्यटकों के अंग दबे थे, बिखरे थे, कटे थे। इतनी बुरी हालत थी कि हाथ लगाते शरीर टूट रहे थे। सचमुच ही दिलेर हैं वे लोग जो राहत और बचाव में जुटकर शवों को चट्टानों के बीच से निकालकर सुरक्षित जगह और एंबुलेंस तक पहुंचा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें, तो शनिवार से ही यहां चट्टानें रुक-रुक कर गिर रही थीं। सभी इसे सामान्य घटना और रूटीन समझ रहे थे। कोई भी यह इशारा नहीं समझ पाया कि पहाड़ी के बीच से मौत सिर उठा रही है।