सराहां में बनेगा बावन भगवान का मंदिर

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सराहां : एक पग में सम्पूर्ण पृथ्वी को नाप कर राजा बलि का अभिमान चूर करने वाले बावन भगवान को दशकों बाद आखिरकार सराहां के प्राचीन शिरगुल ताल पर स्थान मिल ही गया है।जी हाँ जल्द ही सराहां के शिरगुल ताल पर बावन भगवान का छोटा परन्तु भव्य मंदिर का निर्माण कर विधिवत प्राणप्रतिष्ठा कर मूर्ति स्थापित की जाएगी।गौरतलब है कि सराहां के इलाके में व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1940 के दशक में सराहां के कुछ दुकानदारों व स्थानीय ग्रामीणों के प्रयास से बावन द्वादशी के मेले का आयोजन किया जाने लगा।बड़े बजुर्गो के मुताबिक उस समय इस मेले में लोग खरीद फरोख्त के अतिरिक्त आपसी मेल मिलाप व मनोरंजन के उद्देश्य से यहाँ आते थे ।

समय की बदलती रफ्तार के चलते धीरे धीरे इस मेले की लोकप्रियता बढ़ती गई ,जिसके चलते पहले यह जिला स्तरीय और अब राज्य स्तर का दर्जा इस मेले को मिला।लेकिन अक्सर यहां के निवासियों व आगन्तुकों को यह बात कचोटती रहती थी कि जिस बावन भगवान के नाम पर उनके जन्मोत्सव बावन द्वादशी के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता है उनकी न तो कोई मूर्ति और न ही कोई मंदिर यहां पर मौजूद है।हालांकि यहाँ के राम मंदिर में ही बावन द्वादशी के अवसर पर पूजा अर्चना हवन यज्ञ किये जाते थे और भगवान राम,कृष्ण या बावन सभी विष्णु भगवान के ही रूप है परंतु प्रभु के बावन रूप मै मंदिर में मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना करने की सभी श्रद्धालुओ की हार्दिक इच्छा रहती थी ।जो कि यदि प्रभु ने चाहा तो इस बावन द्वादशी पर पूर्ण होने वाली है।

बावन द्वादशी मेले को लेकर आयोजित एक बैठक में एसडीएम पच्छाद डॉ संजीव धीमान ने जानकारी दी कि शिरगुल ताल के पास स्थित खेड़ा महाराज के समीप 10*10 फ़ीट के एरिया में 2लाख 84 हजार की अनुमानित राशि से मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।जो कि बावन द्वादशी के मेले से पहले पूरा होगा।गौरतलब है कि एक वर्ष पूर्व 2लाख 70 हजार के लगभग राशि से निर्मित बावन भगवान की धातु की मूर्ति जिसका वजन दो क्विंटल से अधिक है सराहां लाई गई थी जो कुछ दिन एसडीएम कार्यालय में रही और फिर पिछले मेले के दौरान जो कि सांकेतिक रूप से आयोजित किया गया था उस मूर्ती को राम मंदिर में रखा गया था।करोना महामारी के चलते मूर्ति स्थापना व उसके स्थान को लेकर अड़चने चली आ रही थी।लेकिन यदि इस वर्ष बावन भगवान के आदेश हुए तो बावन द्वादशी का यह मेला बावन भगवान के अपने मंदिर में पूजा अर्चना,हवन यज्ञ के पश्चात विधिवत आरम्भ होगा।