सेब कार्टन के रेट पर उलझा एचपीएमसी, चार दिन से दाम फाइनल नहीं, आठ जुलाई को खुले थे टेंडर

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हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन शुरू हो चुका है। सेब मंडियों में सेब आना शुरू हो गया हैं, लेकिन एचपीएमसी की ओर से अभी तक सेब कार्टन का दाम तय नहीं किया गया है। एचपीएमसी इस बार सेब कार्टन के दाम तय करने में उलझ गया है। दरअसल सेब कार्टन के दामों में बढ़ोतरी को लेकर बागबानों की ओर से लगातार संघर्ष किया जा रहा है। बागबान कार्टन के दामों में हुई बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में टेंडर खुलने के बाद भी एचपीएमसी सेब कार्टन का दाम तय नहीं कर पा रहा है। गौरतलब है कि सेब कार्टन की सप्लाई के लिए एचपीएमसी ने जो टेंडर बुलाए थे, वह टेंडर आठ जुलाई को खोल दिए गए हैं, लेकिन अभी तक टेंडरिंग कमेटी ई वेल्यूएशन प्रोसेस में उलझी हुई है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही हैं कि बुधवार को एचपीएमसी की ओर से सेब कार्टन के रेट निर्धारित किए जा सकते हैं।

कार्टन, ट्रे व सेपरेटर की कीमतें तय न हो पाने से बागबान ओपन मार्केट में ठगे जा रहे हैं। यह दर्शाता है कि सरकार और इसके उपक्रम 5000 करोड़ रुपए के सेब उद्योग के लिए कितने गंभीर हैं। एचपीएमसी ने बीते साल 21 जून को ही सेब की पैकेजिंग सामग्री के रेट तय कर लिए थे। इस बार सेब सीजन 10 से 12 दिन अर्ली होने के बावजूद कार्टन के रेट तय नहीं किए गए हैं। सरकारी उपक्रम एचपीएमसी बागबानों को मार्केट रेट से कम कीमत पर कार्टन मुहैया कराता है। इसके लिए एचपीएमसी सीजन शुरू होने से पहले ही टेंडर आमंत्रित करके सबसे कम दाम पर पेटी, ट्रे व सेपरेटर देने वाली कंपनी को चयनित करता है और संबंधित कंपनी सीजन के दौरान बागबानों को सेब की पैकेजिंग सामग्री मुहैया कराती है।

सडक़ों पर उतर रहे बागबान

सेब की पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद बागबान सडक़ों पर हैं और एचपीएमसी से जल्द कीमतें तय करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि एचपीएमसी द्वारा सेब की पैकेजिंग सामग्री के रेट तय करने के बाद ओपन मार्केट में होने वाली लूट और मनमाने दाम पर भी कुछ हद तक अंकुश लग जाता है, लेकिन इस बार बागबानों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।