स्कूलों के करीब 8.50 लाख बच्चों को अगले महीने मिल सकती है नि:शुल्क वर्दी

राज्य के सरकारी स्कूलों के करीब 8.50 लाख बच्चों को नि:शुल्क वर्दी इस महीने या अगले महीने मिल सकती है। यह वर्दी अभी तक मिल भी जानी थी, लेकिन सिविल सप्लाई के स्तर पर इसका ऑर्डर ही प्लेस नहीं हुआ। बीच में यह तर्क दिया गया कि कोड ऑफ कंडक्ट के कारण इस काम में देरी हुई। अब चुनाव आचार संहिता हटने के बाद भी यदि अगले सप्ताह में यह आर्डर प्लेस हो गया, तो नवंबर आखिर या दिसंबर में वर्दी आना शुरू हो जाएगी और बच्चों को भी मिल जाएगी। राज्य सरकार पहली से बारहवीं तक के बच्चों को यह वर्दी नि:शुल्क देती है और इनमें से पहली से दसवीं तक सिलाई का खर्चा भी दिया जाता है। सरकार ने खरीद में देरी को रोकने के लिए मफतलाल एंड संस को ही दो साल पुराने रेट पर बिना टेंडर के लिए आर्डर दिया है।

शिक्षा विभाग की तरफ से क्लीयरेंस हो गई है, लेकिन सिविल सप्लाई के यहां से आर्डर प्लेस नहीं हो पाया। हालांकि जिस फर्म को यह आर्डर दिया जा रहा है, वह पिछले कई सालों से वर्दी सफाई कर रही है और सप्लाई आर्डर मिलने के एक या दो हफ्ते के भीतर सप्लाई शुरू कर सकती है। करोना के कारण स्कूल पूरी तरह नहीं खुल पाए और पहली से सातवीं की कक्षाएं अभी ऑनलाइन ही चल रही हैं, लेकिन वर्दी सभी बच्चों को विभाग बांट रहा है। कोरोना के टाइम में प्राइवेट स्कूलों से करीब 20000 से ज्यादा बच्चे सरकारी स्कूलों में वापस लौटे हैं। इसलिए वर्दी का सप्लाई आर्डर भी लास्ट में बदलना पड़ा था।

भाजपा ने अपने दृष्टि पत्र में तीन कक्षाओं को स्कूल बैग देने का वादा भी किया था, लेकिन अभी तक यह दिया नहीं गया है। इसलिए कैबिनेट की सोमवार को होने वाली बैठक में इस बारे में एजेंडा जा सकता है, ताकि सरकार से इस खरीद को लेकर मंजूरी ली जा सके।