चार सीटों के लिए अब 18 प्रत्याशी मैदान मेें, किसी भी सीट से नामांकन वापिस नहीं

हिमाचल प्रदेश की चार सीटों के चल रहे उपचुनावो में प्रत्याशियों की तस्वीर अब साफ हो गई है। बुधवार को नामांकन वापसी का आखिरी दिन था, लेकिन किसी भी सीट से नामांकन वापिस नहीं हुआ। ऐसे में हिमाचल की चार सीटों के लिए अब 18 प्रत्याशी मैदान मेें है। मंडी संसदीय क्षेत्र से छह प्रत्याशी चुनावी रण में हैं। अर्की विधानसभा क्षेत्र से तीन प्रत्याशी, फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच और जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से चार प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही थी कि जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से चेतन बरागटा नामांकन वापस ले सकते हैं, लेकिन चेतन बरागटा ने नामांकन वापस नहीं लिया। ऐसे में अब साफ हो गया है कि जुब्बल कोटखाई में तीन उम्मीदवारों की बीच मुकाबला कड़ा होने वाला है। हालांकि जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से चार उम्मीदवार मैदान में है, लेकिन मुख्य लड़ाई तीन के बीच मानी जा रही है। इनमें कांग्रेस प्रत्याशी रोहित ठाकुर, भाजपा प्रत्याशी नीलम सरैइक और बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे चेतन बरागटा शामिल हैं। वहीं मंडी संसदीय क्षेत्र से खुशहाल ठाकुर भाजपा प्रत्याशी, कांग्र्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह, लोकनीति पार्टी से अंबिका श्याम, हिमाचल जनक्रांति पार्टी से मुंशीराम ठाकुर, निर्दलीय उम्मीदवार अनिल कुमार और सुभाष मोहन चुनाव लड़ेंगे।

 इसके अलावा फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी भवानी पठानिया, भाजपा प्रत्याशी बलदेव ठाकुर, निर्दलीय उम्मीदवार डा. राजन सुशांत, अशोक कुमार सोमल और पंकज दर्शी चुनाव लड़ेंगे। अर्की विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी रत्नपाल सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी संजय अवस्थी और निर्दलीय उम्मीदवार जीतराम चुनावी मैदान में होंगे। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश की चार सीटों के लिए पहले 24 प्रत्याशियों ने नामांकन भरा था। इनमें से छह प्रत्याशी नामांकन प्रक्रिया के दौरान बाहर हो गए थे। इनमें कुछ भाजपा और कांग्रेस के कवरिंग कैंडिडेट थे, तो कुछ निर्दलीय प्रत्याशी थे। छंटनी प्रक्रिया के दौरान सिर्फ 18 ही प्रत्याशी चुनावी मैदान में बचे थे। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि नामांकन वापसी के दिन कई उम्मीदवार अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। खासकर कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों पर लोगों की नजरें गड़ी हुई थीं, लेकिन नामांकन वापसी के दिन किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन वापस नहीं लिया है। ऐसे में 30 अक्तूबर को इन 18 प्रत्याशियों के लिए एक संसदीय क्षेत्र और तीन विधानसभा क्षेत्रों पर मतदान होना है। ऐसे में अब देखना यह होगा कि जनता किस पार्टी के कितने प्रत्याशियों को विधानसभा या लोकसभा में जाने का मौका देती है। हालांकि यह मौका एक साल के लिए ही मिलेगा, क्योंकि 2022 में फिर से विधानसभा चुनाव होने है, जबकि लोकसभा चुनाव 2023 में होने हंै। ऐसे में इन चुनावों को सत्ता के सेमीफाइनल के तौर पर भी देखा जा रहा है। इन चुनावों से साफ हो जाएगा कि जनता का रूझान किसकी तरफ है। (एचडीएम)

जुब्बल-कोटखाई में सेब के लिए लड़ाई

जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र के लिए लड़ाई सेब के लिए होने वाली है। मुकाबला तीन उम्मीदवारों के बीच कड़ा होने वाला है। जुब्बल कोटखाई सेब बहुल क्षेत्र है। भाजपा प्रत्याशी नीलम सरेइक सेब बागबानों के हितों को उठाने बात कर रही है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी रोहित ठाकुर का आरोप भी है कि भाजपा सरकार ने बागबानों को अनदेखा किया है। उधर, बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे पूर्व में बागबानी मंत्री रहे नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन भी बागबानों के मुद्दे उठाने का प्रयास कर रहे है। खास बात यह है कि उन्हें चुनाव चिन्ह भी सेब ही दिया गया है।

इतने प्रत्याशी मैदान में

सीट                        उम्मीदवार

मंडी                              छह

जुब्बल कोटखाई            चार

फतेहपुर                       पांच

अर्की                             तीन

चेतन बरागटा छह साल के लिए भाजपा से बाहर

शिमला – जुब्बल कोटखाई में भाजपा बगावत को नियंत्रित नहीं कर पाई और चेतन बरागटा ने नाम वापस लेने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भाजपा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चेतन बरागटा को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। चेतन बरागटा वर्तमान में भाजपा आईटी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक थे।