दीपक चंद का पार्थिव शरीर को देखकर उनकी मां और पत्नी का रो-रो कर बूरा हाल

जम्मू : आतंकी हमले में मारे गए शिक्षक दीपक चंद के जम्मू शहर के रिहाड़ी स्थित आवास से शुक्रवार को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। उनके पार्थिव शरीर को देखकर उनकी मां और पत्नी का रो-रो कर बूरा हाल है। उनकी तीन साल की बेटी को समझ भी नहीं आ रहा कि घर में हो क्या रहा है और उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। दीपक के रिश्तेदार, दोस्त, आसपास रहने वाले लोगों का सुबह से ही उनके घर पर आना-जाना लगा हुआ है। दीपक की मौत से उनका पूरा परिवार आंसुओं के सैलाब में डूब चुका है। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हैं। परिवार ने यहां तक कहा है कि कश्मीर हमारे लिए जन्नत नहीं, नर्क बन गया है। इस मौके पर जम्मू के विभिन्न संगठन भी दीपक को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। पिछले कुछ दिन से कश्मीर में होने वाले आतंकी हमलों को लेकर परेशान थे। दीपक ने अपनी मां से बात करते हुए कहा था कि जिस तरह से कश्मीरी पंडितों को मारा जा रहा है, वह उससे दुखी है।

दीपक की मौत एक सोची समझी साजिश

दीपक की मौत एक सोची समझी साजिश है, क्योंकि दीपक का परिवार मूल रूप से कश्मीर का रहने वाला है। 1990 के दशक में जब कश्मीर में आतंकवाद ने पैर जमाए तो दीपक का परिवार विस्थापित होकर जम्मू आ गया। 2019 में जब केंद्र सरकार ने पीएम पैकेज के तहत कश्मीरी विस्थापितों के लिए शिक्षकों के पद की भर्ती की।

इसी में दीपक की नियुक्ति भी हुई और उसकी पोस्टिंग कश्मीर हो गई। उसकी पत्नी और तीन साल की बच्ची भी उसके साथ रहती थी। एक हफ्ता पहले ही दीपक अपने जम्मू के रिहाड़ी स्थित घर आया था। पिता की पहली बरसी पर घर आए दीपक ने पत्नी और बच्ची को घर पर ही छोड़ दिया था।

उन्होंने कहा कि अब कश्मीर में काफी ठंड बढ़ जाएगी, इसलिए वह अब जम्मू में ही रहें। दीपक की मां का कहना है कि तीन दिन पहले दीपक ने फोन किया था। मैंने पूछा कि कुछ परेशान लग रहा है तो उसने कहा था कि वह कश्मीर में होने वाली हत्याओं को लेकर परेशान है।