टोक्यो ओलंपिक: एक और मेडल भारत के नाम , रवि दहिया ने जीता सिल्वर

टोक्यो ओलंपिक में सत्तावन किलो भार वर्ग में भारत के पहलवान रवि कुमार दहिया इतिहास रचने से चूक गए। फाइनल मुकाबले में उन्हें सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा। हालांकि रवि ने रूस के पहलवान जवुर युगेव के सामने कड़ी चुनौती पेश की, लेकिन अंत में रवि दहिया 4-7 से मुकाबला हार गए। इस प्रकार गोल्ड मेडल की दहीज पर खड़े रवि को सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा।

इससे पहले भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने यहां गुरुवार को टोक्यो ओलंपिक में जर्मनी को हरा कर ४१ वर्षों बाद ओलंपिक कांस्य पदक जीत कर पदक का सूखा खत्म किया। वर्ष १९८० के मॉस्को ओलंपिक खेलों के बाद यह भारत का पहला ओलंपिक हॉकी पदक है, वहीं यह ओलंपिक के इतिहास में भारत का तीसरा हॉकी कांस्य पदक है। अन्य दो कांस्य पदक १९६८ मेक्सिको सिटी और १९७२ म्यूनिख खेलों में आए थे। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ओवरऑल ओलंपिक में १२ पदक जीते हैं, जिसमें आठ स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं।

मैच की बात करें तो दोनों टीमों ने अपनी ताकत के साथ हॉकी खेली। जर्मनी शुरुआत में भारत के मुकाबले थोड़ा हावी रहा। दूसरे मिनट में पहला गोल भी जर्मनी की तरफ से ही हुआ। मिड फील्डर ओरुज तिमूर ने शानदार गोल करते हुए टीम को १-० से बढ़त दिलाई। इसके बाद भारत ने एक गोल की तलाश में आक्रामकता दिखाई, लेकिन गोल नहीं हो पाया और पहला क्वार्टर १-० के स्कोर पर समाप्त हुआ। दूसरा क्वार्टर शुरू होते ही भारत को वह गोल मिला, जिसकी उसे तलाश थी। फॉरवर्ड सिमरनजीत सिंह ने १७वें मिनट में शानदार गोल दाग कर टीम को बेहद जरूरी १-१ की बराबरी कराई, हालांकि इसके बाद जर्मनी ने एक-एक मिनट के अंतराल में दो गोल करके अपनी बढ़त को ३-१ कर लिया। फॉरवर्ड वेलेन निकलस