पीएम नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट केदारनाथ में पुर्ननिर्माण का पहला चरण पूरा

रूद्रप्रयाग:  बीते 8 सालों में केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) की तस्वीर बदल गई है. आज केदारनाथ धाम में पुर्ननिर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं. पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल केदारनाथ में पुर्ननिर्माण का प्रथम चरण का कार्य पूर्ण हो चुके हैं और द्वितीय चरण के कार्य केदारनाथ धाम में चल रहे हैं, जिसमें धाम में आदिगुरू शंकराचार्य समाधी पुर्ननिर्माण के साथ ही शंकराचार्य की विशाल मूर्ति, तीर्थ पुरोहित आवास और घाटों के निर्माण का कार्य भी चल रहा है. यही नहीं, यात्रा की दृष्टि से देखा जाए तो तीर्थयात्रियों के खाने, ठहरने जैसी सुविधाओं को व्यवस्थाओं में सुधार हुआ. इससे साफ है कि बीते वर्षों में यात्रा पटरी पर लौटी, लेकिन कोरोना की मार से धाम में बीते दो वर्षों से सन्नाटा पसरा हुआ है.

एक और जहां तेजी से पुर्ननिर्माण कार्य हो रहे हैं, तो वहीं दूसरी और कई बड़े मुद्दे दबकर रह गये हैं. केदारनाथ धाम में पुर्ननिर्माण कार्य बीते कई सालों से चल रहे हैं, लेकिन 360 नाली के सबसे बड़े भूमिधर श्री केदारनाथ मंदिर को एक नाली भूमि पर भी अब तक जिला प्रशासन द्वारा कब्जा नहीं दिया गया है. यही नहीं, पीढ़ि‍यों से केदारनाथ धाम में रह रहे लोगों के भी अब तक भूमि नाम नहीं की गयी है. इस बारे में केदारनाथ विधायक मनोज रावत का कहना है कि जब तक जमीन का मामला नहीं सुलझता तब तक सब शून्य ही है.

मंत्री धन सिंह रावत ने कही ये बात
इसके अलावा जिला प्रशासन केदारनाथ धाम में पुर्ननिर्माण कार्यों में तेजी के दावे कर रहा है. रूद्रप्रयाग के डीएम मनुज गोयल का कहना है कि धाम में पुर्ननिर्माण को लेकर कार्य तेजी से चल रहे हैं और कई कार्य गतिमान हैं. वहीं, जिले के प्रभारी मंत्री धन सिंह रावत ने भी अधिकारियों को पुर्ननिर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए. उनका कहना है कि धाम में मास्टर प्लान की ड्रांइग के अनुसार 70 से 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है.

बहरहाल, इसमें कोई शंका नहीं है कि 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम में पुर्ननिर्माण के कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन कोरोना के कारण जरूर बीते दो वर्षों में पुर्ननिर्माण कार्य भी प्रभावित हुए है. इसके अलावा स्थानीय भूमि स्वामित्व जैसे मुद्दों के हल निकालना भी प्रशासन के लिए जरूरी है जिस पर अभी पुर्ननिर्माण कार्य के साथ ही बहुत कुछ किया जाना बाकी है. वैसे इस आपदा में 4000 से अधिक लोग मारे गए थे और इसकी यादभर से रोंगटे खड़े हो जाते हैं.