सराहां: मिट्टी-पत्थर गिरने से घिन्नीघाड वासियों की बड़ी मुसीबत

सराहां में हो रहे भवन निर्माण के लिए पहाड़ियों को काट कर समतल बनाया जा रहा है जिसके मलबे को साथ ही लगती ढाँक में गिराया जा रहा है। पहाड़ियों को काटकर निकल रहे इस मिट्टी-पत्थर ने घिन्नीघाड वासियों की मुसीबत बढ़ा दी है। इससे पानी के साथ बहकर आ रही सिल्ट से जहां क्षेत्र के पेयजल स्त्रोत बन्द हो गए हैं जिस कारण समूचे क्षेत्र में पेयजल संकट बढ़ गया है।

गोरतलब है कि क्षेत्र से निकलने वाली इस खड्ड में अब गांव देवरिया दसाणा, रुनजा भरमुर, ठाकुरद्वारा तथा बम्बयार बड़यार तक सारे डब्बर व कुंए इस मलबे से पूरी तरह भर गए हैं। इससे न केवल पेयजल स्रोत बन्द हो गए बल्कि क्षेत्र में पशुओं के लिए भी पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। इसी खड्ड में बम्बयार बड़यार में बसरोह का डब्बर पर ठाकुरद्वारा उठाऊ पेयजल योजना बनी है जोकि करीब 25-30 साल पहले बनी थी। इस योजना से दो पंचायतों काटली व जामन की सेर के करीब 700 परिवार लाभान्वित होते हैं। लेकिन अब यह पेयजल योजना बन्द होने की कगार पर है कारण यहां करीब 20-25 फुट गहरी डब्बर होती थी जो अब मलबे से समतल हो गई है।

वहीं इस खड्ड पर जल स्रोत के ठीक आगे विभाग द्वारा कुछ वर्षों पहले 6 फिट ऊँची दीवार लगाई गई। इससे पानी के बहाव में पहाड़ी से डंपिंग की गई मिट्टि व पत्थर आने से पूरी तरह भर गई और जिससे अब यह दीवार भी मिट्टि में दब गई है। ग्रामीणों का कहना है कि 25-30फुट गहरी व 100 मीटर लम्बी यह खड्ड अब मलबे से भर गई है जिससे उन्हें अब पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि इस समस्या बारे वह विभाग, प्रशासन व सरकार के समक्ष कई बार रख चुके है लेकिन अभी इसका कोई समाधान नही किया गया है। ग्रामीणों ने कहा कि विभाग खड्ड में लगी दीवार को तोड़े ताकि पानी के बहाव से यह मलबा बाहर निकल सके। वही ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सराहां स्तिथ पहाड़ी की डंपिंग को रोका जाए।

गौर करने की बात यह भी है इस मलबे के बारे में किसान सभा ने भी प्रशासन को अवगत करवाकर उचित कार्यवाही की मांग थी लेकिन प्रशासन से गुहार लगाने पर भी इसका कोई समाधान नही हुआ है।