कोरोना महामारी के बीच इलाके के लोग रामभरोसे: मुसाफ़िर

सराहां:  महामारी के बीच इलाके के लोग रामभरोसे,कोई नही ले रहा है सुध ये बात मुसाफ़िर  ने प्रेस को दिये अपने ब्यान में कही। मुसाफ़िर जी ने कहा कि कोरोना संकट के बीच अब सस्ते राशन को भी मेंहगा पाकर अब जनता का विश्वास सरकार से उठ गया हैं, ओर मॅहगाई को कम करने का वादा भी जुमला ही साबित हो रहा है,जहां दालों का मूल्य 15 से 20 रुपये मेंहंगी हुई है वही सरसो का तेल 60 रुपये मेंहगा हो गुण गया है, लगातार मूल्यवृद्धि के कारण मॅहगाई आसमान छू रही है।

लोकडॉउन तथा कर्फ्यू के कारण उद्योग धंधे बन्द

उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में लोकडॉउन तथा कर्फ्यू के कारण उद्योग धंधे बन्द होने के कगार पर है और बेरोजगारी अपने चरम पर है,आम आदमी को आज रोजगार की तलाश में भटकने के बावजूद भी कुछ हाथ नही लग रहा है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि सबक साथ ,सबका विकास की दुहाई देने वाली सरकार हाथ मे हाथ धरे कोरोना की आड़ में अपने राजधर्म का निर्वहन करने में बुरी तरह विफल रही है,20 लाख करोड़ का जो आर्थिक पैकेज केंद्र ने दिया था,उससे ये उम्मीद थी कि किसानो, बागवानों, छोटे दुकानदारो,युवाओं और बेरोजगार लोगो को शायद उससे कुछ लाभ मिलेगा परंतु वो इस सदी का सबसे बड़ा जुमला निकला, आमजनता अपने आप को ठगा सा महसूस कर रही है ओर जवाब देने को तैयार बैठी है. मुसाफ़िर ने कहा कि इस निक्कमी-झाँसेवाली ओर बड़ी वडी बाते करने वाली सरकार की कथनी और करनी में काफी अंतर है, देश और प्रदेश इस समय आर्थिक दिवालियापन की ओर बढ़ रहा है,जनता का मोह अब इस सरकार से भंग हो चुका है तथा भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में लोगो को हो रही परेशानी
उन्होंने कहा कि पच्छाद के भाजपा नेता भी अब इस बात को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मान रहे है कि पहले भी विकास हुआ है और इतनी सड़के यहां बनी है कि उनके रखरखाव में दिक्कत हो रही है,इसका मतलब वो आज से पहले झुठ की राजनीति करते रहे है,जब बोलते थे कि यहां कोई विकास नही हुआ है जबकि सच्चाई यह है कि यहां हुये विकास कार्यो का आज की सरकार रखरखाव भी नही कर पा रही हैं.

उन्होंने कहा कि दुरदराज क्षेत्रों से जो मेडिकल ओर पैरामेडिकल स्टाफ डेपुटेशन पर अस्पतालों में भेज गया है उनका डेपुटेशन निरस्त किया जाए या उनकी जगह दूसरा स्टाफ भेज जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगो को परेशानी का सामना ना करना पडे,अगर तुरंत इस पर कार्यवाही नही हुई तो जनता के पास इस संकट के घड़ी में आंदोलन की राह के अतिरिक्त कोई चारा नही होगा,जिसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार ओर स्थानीय प्रतिनिधित्व की होगी जो इन इलाको की अनदेखी करने में कोई कसर नही छोड़ रहे है