बुरास के फूल इन दिनों चारों तरफ बिखेर रहे हैं अपनी खुशबू

हिमाचल की शान और पहचान बुरास के फूल इन दिनों चारों तरफ अपनी खुशबू बिखेर रहे हैं. गर्मियों की आहट के साथ ही जंगलों में इनके खिलने का क्रम शुरू हो गया है. करीब एक माह तक बुरास इसी तरह से जंगलों को सुंदर बनाए रखेगा. इनकी महक से हर कोई बरबस जंगल की तरफ खिंचा चला जाता है. ये फूल खासकर देशी-विदेशी सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. राज्य पुष्‍प का दर्जा प्राप्त बुरास का धार्मिक महत्व भी बताया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बैसाख की साजी के अवसर पर बुरास के फूलों से मालाएं बनाकर मंदिरों और अपने घरों में लगाते हैं.

बुरास के फूल इन दिनों चारों तरफ अपनी खुशबू बिखेर रहे हैं

हिमाचल में बुरास के फूल 1800 से 2800 मीटर की तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आसानी से देखे जा सकते हैं. जिला सिरमौर की अगेर बात की जाए तो यहा के जंगल में भी ये काफी पाए जाते है . प्रदेश में मुख्यत: लाल और गुलाबी रंग का बुरास पाया जाता है. इनमें गुलाबी रंग के बुरास को हिमाचल सरकार ने साल 2007 में स्टेट फ्लावर का दर्जा दिया है. इसके बाद इस फूल का महत्व और भी बढ़ जाता है.

करीब एक माह तक बुरास इसी तरह से जंगलों को सुंदर बनाए रखेगा

करीब एक माह तक बुरास इसी तरह से जंगलों को सुंदर बनाए रखेगा. इनकी महक से हर कोई बरबस जंगल की तरफ खिंचा चला जाता है. ये फूल खासकर देशी-विदेशी सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. राज्य पुष्‍प का दर्जा प्राप्त बुरास का धार्मिक महत्व भी बताया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बैसाख की साजी के अवसर पर बुरास के फूलों से मालाएं बनाकर मंदिरों और अपने घरों में लगाते हैं. बुरास के गुणों की बात की जाए तो इसका प्रयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. यही नहीं, बुरास से निर्मित जूस और स्क्वैश भी खूब पसंद किया जाता है. इसकी एक और खास बात यह है कि बंदर भी इसे नहीं खाते हैं.

पहाड़ी फूल और इसका महत्व

बुरास (Rhododendron flower) के फूलो से बैशाख सक्रान्त का उत्सव मनाया गया सराज में देवताओ के मंदिर से लेकर आम आदमी के घर तक धूमधाम से मना उत्सव कई गुणों की खान है | जंजैहली सराज में बुरास के फूलो से बैशाख सक्रान्त का उत्सव मनाया गया। यह फूल तीन रंगों में पाया जाता है। जोकि सफेद लाल और गुलाबी होता है। मगर लाल बुरास के फूलो से ही विशेष पूजा की जाती है। यह बहुत ही सुंदर और लुभावना फूल है। इस फूल का सभी पशु पक्षी कीड़े मकोड़े आदमी सभी लोग इन फूलों का प्रयोग किसी ना किसी रूप में करते हैं। ब्रास ना केवल देखने में सुंदर होता है यह अपने गुणों के लिए भी जाना जाता है। कुछ लोग इन फूलों का गुलदस्ता बनाते हैं और अपने घरों की शोभा बढ़ाते हैं। कुछ लोग इस इन फूलों की पत्तियों का शरबत बनाते हैं। कुछ चटनी और कुछ लोग इसे सुखाकर पाउडर बनाते हैं।

नव वर्ष के उपलक्ष्य में इन फूलों की से पूजा की जाती है। इन फूलों को घर के मांडला, गौशाला के दरवाजे पर, घर के दरवाजों पर पलाई में लगाया जाता है। पलाई अर्थात एक पर लंबी डंडे पर ब्रास के फूल चिल्लू और दूब लगाई जाती है। अब यह प्रथा कम हो गई है क्योंकि अब पेड़ काटने नहीं दिए जाते। ब्रास के फूल गुणों की खान है। जिस किसी वजह से किसी को चक्कर आता हो तो इनकी पतियों का शरबत या चटनी बनाकर खिलाते हैं यह बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक शीतल पेय है। जिसको किसी गर्मी की वजह से नकसीर आती हो तो ब्रास की फूलों की पत्तियों का सेवन करने से ठीक हो जाते हैं। खून की कमी को पूरा करते हैं वजन बढ़ने नहीं देता ब्रास के फूल से बनने वाले शब्द को यदि नियमित पीते रहे तो इससे त्वचा साफ हो जाती हैं।