मोदी सरकार कर रही है अंतराष्ट्रीय धरोहर कालका शिमला हैरिटेज रेल लाइन के निजीकरण की तैयारी

सोलन:  केंद्र की मोदी सरकार हिमाचल प्रदेश की अंतराष्ट्रीय धरोहर कालका शिमला हैरिटेज रेल लाइन के निजीकरण की तैयारी कर रही है. देशभर में चार ऐसे अंतराष्ट्रीय धरोहर को निजी हाथों को सौंपा जाएगा. इसी कड़ी में कालका-शिमला (Kalka-Shimla Rail line) रेलवे लाइन को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारियाँ चल रही हैं. हिमाचल का शिमला-कालका हेरिटेज रेल ट्रैक, पश्चिम बंगाल का सिलीगुड़ी-दार्जिलिंग, तमिलनाडु का नीलगिरी और महाराष्ट्र का नेरल-माथेरान ट्रैक इसमें शामिल है. ये सालाना करीब 100 करोड़ रुपये घाटे पर चल रहे हैं.

हालांकि हिमाचल प्रदेश की इस विश्व धरोहर को बेचने की बात उठते ही इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है. प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने कालका-शिमला रेल लाइन को बेचे जाने की खबरों पर आपत्ति जताई है.

वर्ष 1903 में शुरू हुए कालका-शिमला रेलवे ट्रैक को अब 118 वर्ष पूरे हो चुके हैं. अंग्रेजों हुकूमत ने इसे बनवाया था और यूनेस्को ने इस रेलवे ट्रैक को आठ जुलाई 2008 को विश्व धरोहर का दर्जा दिया था. इस मार्ग पर 103 सुरंगें, 300 के करीब छोटे बड़े आकर्षक पुल, अंग्रेजों के समय के बनाए गए 22 रेलवे स्टेशन हैं. शिमला के लिए यह इकलौती रेललाइन है. जो कालका से शुरू होते हुए सोलन से गुजर कर शिमला पहुंचती है.

सोलन से गुजरने वाले इस ट्रैक को लेकर निजी हाथों पर सौंपने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस नेता कुलराकेश पंत ने नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि रेलवे और सरकार के पास शायद इतने समझदार और कुशल अधिकारी नहीं हैं. इस वजह से विश्व धरोहर रेल मार्ग बिकने जा रहा है. सोलन के पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष कुल राकेश पंत ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार सरकारी उपक्रमों को बेचती जा रही है. ऐसे में अब सरकार सरकारी उपक्रमों को बेचने का कलेंडर जारी कर दे. उन्होंने कहा कि अब सामाजिक संस्थाओं को एक होकर केंद्र सरकार के खिलाफ अभियान चलाने की आवश्यकता है.

रेल भूमि विकास प्राधिकरण ने इन चारों माउंटेन नैरोगेज ट्रैक पर सर्वेक्षण शुरू करवाया है. दिल्ली की एक कंसल्टेंसी कंपनी सर्वेक्षण करेगी, जिसे मार्च तक पूरा किया जा सकता है. उसके बाद इन ट्रैक को निजी हाथों में सौंपा जाएगा.