किसान आन्दोलन : दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए सिंघु-टिकरी बार्डर पर बैरिकेडिंग

किसानों से दोबारा बातचीत शुरू करने के दावे के बीच केंद्र सरकार ने 69 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों के रास्ते में कांटे बिछा दिए हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ  प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए सिंघु, टीकरी बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर दी है। दिल्ली-हरियाणा को जोड़ने वाले सिंघु में चार लेयर की बैरिकेडिंग के साथ सीमेंट के अवरोधकों के बीच लोहे की छड़ें लगाई जा रही हैं। टीकरी पर पहले चार फुट मोटी सीमेंट की दीवार बनाकर चार लेयर में बैरिकेडिंग की गई। अब सड़क खोदकर उसमें नुकीले सरिया लगा दिए गए हैं। मार्ग पर रोड रोलर भी खड़े किए गए हैं। ट्रैक्टर पर सवार किसान अगर नुकीले सरिया पार कर दिल्ली में घुसने की कोशिश करेंगे, तो कीलों की वजह से गाड़ी पंक्चर हो जाएगी।

 उधर, किसानों ने भी सरकार के इस कदम के बाद अपने तेवर तीखे कर लिए हैं। किसान और सरकार में फिर से बातचीत की चर्चाओं के बीच किसान नेताओं ने साफ  कहा है कि जब तक हिरासत में लिए गए किसानों की रिहाई नहीं हो जाती, तब तक सरकार के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं होगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने मंगलवार को कहा कि पुलिस एवं प्रशासन द्वारा उत्पीड़न बंद होने और हिरासत में लिए गए किसानों की रिहाई तक सरकार के साथ किसी तरह की औपचारिक बातचीत नहीं होगी। कई किसान संगठनों के इस समूह ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि सड़कों पर कीलें ठोंकने, कंटीले तार लगाने, आंतरिक सड़क मार्गों को बंद करने समेत अवरोधक बढ़ाया जाना, इंटरनेट सेवाओं को बंद करना और भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रदर्शन करवाना, सरकार-पुलिस एवं प्रशासन की ओर से नियोजित हमलों का हिस्सा हैं। किसान मोर्चा ने दावा किया कि किसानों के प्रदर्शन स्थलों पर बार-बार इंटरनेट सेवाएं बंद करना और किसान आंदोलन से जुड़े कई ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक करना लोकतंत्र पर सीधा हमला है।

उनका कहना था कि ट्विटर ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया मंच पर करीब 250 ऐसे एकाउंट पर रोक लगा दी, जिनके जरिए किसान आंदोलन से संबंधित फर्जी और भड़काऊ पोस्ट किए गए थे। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार किसानों के प्रदर्शन को विभिन्न राज्यों से समर्थन बढ़ने से बहुत डरी हुई है।बयान में कहा गया है कि सरकार की तरफ से औपचारिक बातचीत का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। ऐसे में हम स्पष्ट करते हैं कि गैरकानूनी ढंग से पुलिस हिरासत में लिए गए किसानों की बिना शर्त रिहाई के बाद ही कोई बातचीत होगी। उधर, मंगलवार को कृषि कानूनों को रद्द करने की विपक्ष की मांग पर लोकसभा और राज्यसभा में भी खूब हंगामा हुआ। इसके चलते सदन की कार्यवाही भी नहीं चल पाई।

अक्तूबर तक चलेगा किसान आंदोलन

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हमने सरकार को बता दिया है कि यह आंदोलन अक्तूबर तक चलेगा। अक्तूबर के बाद आगे की तारीख देंगे। बातचीत भी चलती रहेगी। हमारा नारा है- कानून वापसी नहीं, तो घर वापसी नहीं। उन्होंने दिल्ली हिंसा पर कहा कि नौजवानों को बहकाया गया। उनको लाल किले का रास्ता बताया गया कि पंजाब की कौम बदनाम हो। किसान कौम को बदनाम करने की कोशिश की गई।

सरकार जनता की राह में कांटे लगा रही है

किसानों के आंदोलन स्थल पर पुलिस की किलेबंदी पर किसान नेता राकेश टिकैत ने बड़ा हमला किया है। टिकैत ने कहा कि उन्हें तो दिल्ली के अंदर जाना नहीं है, तो सरकार जनता की राह में कांटे लगा रही है। उन्होंने सड़क अवरुद्ध करने के आरोप पर कहा कि ट्रैफिक को किसानों द्वारा अवरुद्ध नहीं किया गया है। यह पुलिस बैरिकेडिंग के कारण है। राकेश टिकैत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना फोन नंबर बताएं, वो फोन करने के लिए तैयार बैठे हैं। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में कहा था कि सरकार किसानों से केवल एक फोन कॉल की दूरी पर है।