पंचायती चुनाव : अपने ही घर में मात खा गए कांग्रेस-भाजपा के नेता

हिमाचल प्रदेश के जिला  सिरमौर में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले रहे हैं। सत्तारुढ़ दल हो या विपक्षी दल के नेता। सब अपने घर में ही मात खा गए। कांग्रेस-भाजपा के नेता अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के गृह वार्डों में सेंधमारी लगाने में तो कामयाब हो गए, लेकिन अपने वार्ड हाथ से फिसल गए। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप हों या ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी या फिर सत्तारुढ़ दल और विपक्षी दल के विधायक सबके वार्डों में उनका दल फिसड्डी साबित हुआ।

17 वार्डों वाली जिला परिषद में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही राजनीतिक दलों ने पार्टी के समर्थित उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। इसका बाकायदा पहले ही एलान कर दिया गया था। इस बार के चुनाव परिणामों को लें तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप के गृह वार्ड में भाजपा हार गई। कांग्रेस नेता एवं पूर्व विस अध्यक्ष जीआर मुसाफिर भी इसी वार्ड से हैं। वह भी कांग्रेस को यहां से जीत नहीं दिला पाए। इस वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशी ने बाजी मारी। वहीं, ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी और नाहन के विधायक डॉ. राजीव बिंदल के संयुक्त वार्ड माजरा में कांग्रेस जीत दर्ज करने में कामयाब हुई। यह वार्ड ऊर्जा मंत्री का गृह वार्ड है। हालांकि, नाहन हलके के तहत आने वाली कालाअंब और बनकला दोनों ही सीटों पर भाजपा ने परचम लहराया।

शिलाई में विधायक हर्षवर्धन चौहान और पूर्व विधायक एवं खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष बलदेव तोमर अपने अपने जिला परिषद वार्डों में मात खा गए। इतना ही नहीं श्री रेणुका जी में विधायक विनय कुमार के गृह क्षेत्र संगड़ाह की जिला परिषद सीट भी भाजपा की झोली में गई। यहां विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से प्रत्याशी रहे बलवीर के गृह वार्ड नौहराधार में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। राजगढ़ क्षेत्र में भी विधायक रीना कश्यप के देवठी मझगांव वार्ड में भाजपा हार गई है। पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता किरनेश जंग के गृह क्षेत्र बद्रीपुर जिला परिषद वार्ड में भाजपा ने परचम लहराया है।

बीडीसी में  बढ़ सकती है भाजपा  
पंचायत समिति के लिए हुए चुनाव के बाद भाजपा को बढ़त मिलने की उम्मीद है। छह पंचायत समितियों में से भाजपा का अंक आगे रहने की चर्चाएं चल रही हैं। लेकिन, पंचायत समिति के चुनाव में किसी भी दल ने अपनी पार्टी से संबंधित उम्मीदवार का एलान नहीं किया था। लिहाजा, अब दोनों ही राजनीतिक दल जोड़तोड़ में जुटे हैं।