मकर संक्रांति के दिन धार्मिक तीर्थ स्थान काली माँ मंदिर में लगी भगतों की भीड़

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर   के उपमंडल संगडाह  के तहत पड़ने वाले धार्मिक तीर्थ स्थान   काली माँ मंदिर  में इस बार कोरोना के चलते मकर संक्रांति पर यहां लोगों की धार्मिक आस्था में कोई कमी नहीं देखी गई। गुरुवार को मंदिर  में काफी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे ।

कोरोना के चलते इस बार मंदिर  में इतनी भीड़ नहीं देखी गई जितनी हर वर्ष होती थी। इस मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने आते है . माता के इस मंदिर की महानता दूर दूर तक है . लोगों का कहना है की इस मंदिर में मन की मुराद पूरी हो जाती है.

मकर संक्रांति का पर्व किउं मनाया जाता है 

पूरे देश में आज मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है. खगोलशास्त्र के मुताबिक देखें तो सूर्य जब दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं, या पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है उस दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. संक्रांति हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को पड़ती है.

शास्त्रों के अनुसार सूर्य जब दक्षिणायन में रहते हैं तो उस अवधि को देवताओं की रात्रि व उत्तरायण के छह माह को दिन कहा जाता है. दक्षिणायन को नकारात्मकता और अंधकार का प्रतीक तथा उत्तरायण को सकारात्मकता एवं प्रकाश का प्रतीक माना गया है. ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन यज्ञ में दिए द्रव्य को ग्रहण करने के लिए देवता धरती पर अवतरित होते हैं एवं इसी मार्ग से पुण्यात्माएं शरीर छोड़कर स्वर्ग आदि लोकों में प्रवेश करती हैं.