किसानों को कर्ज दिलाने की गारंटी देने वालों की नई मुसीबत हुई खड़ी

हिमाचल में किसानों को कर्ज दिलाने की गारंटी देने वालों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। समय पर वसूली सुनिश्चित करवाने के लिए बैंकों ने अब इन किसानों के खातों को गारंटरों के खातों के साथ जोड़ दिया है। अगर किसान समय पर बैंक का ऋण चुकता नहीं कर पाया तो ऐसे में गारंटर की सिबिल रिपोर्ट भी खराब हो जाएगी। ऐसे में नया कर्ज लेने के लिए किसानों को गारंटरों को जुटाना मुश्किल हो गया है।
राज्य में वर्तमान में लाखों किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बने हुए हैं। मोबाइल एप के माध्यम से भी किसान अपने केसीसी कार्ड का लेखाजोखा देख सकते हैं। एक केसीसी कार्ड धारक किसान दूसरे किसान की गारंटी दे सकता है। पर गारंटी देने वाले किसानों की इस एप पर अब ऐसे किसानों की खाता संख्या भी दर्शाई जाने लगी है, जिनकी गारंटी दी गई है।
यही नहीं, गारंटर की अपनी एप से भी ऋणधारक किसान के खाते में पैसा जमा करने का प्रावधान दर्ज करवाया गया है। इससे गारंटर किसान परेशान हो गए हैं। बैंक की ओर से गारंटरों को यह भी चेतावनी दी जा रही है कि अगर ऋणी किसान से समय पर वसूली नहीं की गई तो उसकी सिबिल तक खराब हो सकती है। इससे गारंटी देने वाले भी परेशान हैं।
1.60 लाख रुपये तक कोई भी बैंक गारंटी नहीं ली जाती है। कर्ज की वसूली में पहला नोटिस मुख्य ऋणी किसान को दिया जाता है। दूसरा गारंटर को दिया जाता है। स्वाभाविक है, इसलिए गारंटर का खाते से ऋणी का खाता अटैच किया जाता है। मोबाइल एप का मामला देखने के बाद ही बताया जा सकता है। – पीके शर्मा, राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के राज्य प्रभारी