हिमाचल में लाखों किसानों को नहीं मिल रहा मक्की का न्यूनतम समर्थन मूल्य

हिमाचल प्रदेश के लाखों किसानों को मक्की का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। मक्की उत्पादकों को अपनी तैयार फसल बेचने के लिए खुद बाजार तलाशना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में किसानों को मक्की के बाजार में उचित दाम तक नहीं मिल रहे हैं। प्रदेश में गेहूं और धान से ज्यादा मक्की फसल की पैदावार होती है। प्रदेश के किसानों को हर साल मक्की की फसल का बाजार में उचित दाम नहीं मिलता है।

इससे किसानों की मक्की की उत्पादन लागत तक पूरी नहीं हो रही है। पिछले साल कोरोना के कारण प्रदेश के किसानों को मक्की के अच्छे दाम नहीं मिले थे। किसानों की मक्की पिछले साल 700 से 800 रुपये क्विंटल बिकी थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में करीब एक लाख हेक्टेयर जमीन में किसान मक्की की पैदावार हो रही है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में मक्की पैदा की जा रही है।

किसान मांग रहे मक्की का एमएसपी
प्रदेश के किसान मक्की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग कर रहे हैं। हिमास किसान सभा के महासचिव संजय चौहान कहते हैं कि प्रदेश के मक्की उत्पादक किसानों को फसल का एसएसपी तय किया जाए। भारतीय खाद्य आपूर्ति निगम के माध्यम से मक्की की खरीद की जाए। प्रदेश के कृषि निदेशर नरेश ठाकुर कहते हैं कि प्रदेश के मक्की उत्पादकों को अभी मक्की का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की कोई व्यवस्था नहीं है। मक्की प्रदेश में करीब एक लाख हेक्टेयर में पैदा की जाती है।