हिमाचल में ओल्ड पेंशन की उम्मीदों को झटका, पेंशन फंड रेगुलेटर ने कंट्रीब्यूशन का पैसा लौटाने से किया इनकार

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हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों की ओल्ड पेंशन बहाल होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने न्यू पेंशन स्कीम की जगह ओल्ड पेंशन स्कीम बहाल करने की संभावनाओं पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। इस बारे में राजस्थान सरकार को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन काम कर रहे पेंशन फंड रेगुलेटर से गई  चिट्ठी हिमाचल सरकार को भी मिल गई है। हिमाचल में 2004 के बाद से सभी सरकारी कर्मचारी न्यू पेंशन स्कीम के दायरे में हैं और ये आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली का इंतजार कर रहे हैं। इनकी संख्या एक लाख से थोड़ा ज्यादा है। वर्तमान में हर एनपीएस कर्मचारी पेंशन फंड में 10 फीसदी का योगदान करता है, जबकि राज्य सरकार 14 फीसदी हिस्सा देती है। इस कारण अब तक करीब 6300 करोड़ फंड एनपीएस में जा चुका है। ओल्ड पेंशन के लिए एनपीएस कर्मचारी संघ मानसून सत्र में विधानसभा के घेराव की तैयारी भी कर रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस

साल 23 फरवरी, 2022 को बजट भाषण में ओल्ड पेंशन को लागू करने का ऐलान किया था। राजस्थान में इस वक्त तीन लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी हैं और उनका एनपीएस कंट्रीब्यूशन 30 हजार करोड़ से ज्यादा का है। 21 अप्रैल को राजस्थान सरकार ने भारत सरकार को पत्र भेजा कि उन्होंने अपने यहां एनपीएस को बंद करने का फैसला किया है, इसलिए अब तक राजस्थान सरकार की ओर से एनपीएस में जमा करवाए गए फंड को रेवेन्यू रिसीट के तौर पर वापस लौटा दिया जाए। अब एनपीएस का पैसा संभाल रही पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी यानी पीएफआरडीए के सहायक जनरल मैनेजर प्रदीपो चटर्जी ने राजस्थान सरकार को जवाब भेजा है कि इस स्कीम में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए भारत सरकार यह पैसा नहीं लौटा सकती।

इसके बाद से राजस्थान ने इस स्कीम पर कोई नई नोटिफिकेशन अब तक नहीं की है, जबकि झारखंड की सरकार ने भी ओल्ड पेंशन को बहाल करने का ऐलान कर दिया है। दरअसल केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन एनपीएस फंड में जा रहा पैसा पीएफआरडीए देखती है और इसे इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी यानी आईआरडीए के माध्यम से चार फंड्स में लगाया जाता है। इसमें एलआईसी, एसबीआई और यूटीआई शामिल हैं। इस प्रक्रिया में एनएसडीएल सिर्फ रिकॉर्ड कीपिंग का काम करता है और पैसा मार्केट में इन तीन बीमा कंपनियों के जरिए लगता है। इसलिए कर्मचारियों की ओर से जमा करवाया गया फंड मार्केट में ऑलरेडी लगा हुआ है। हिमाचल में 2003 में इस स्कीम को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 2004 से इसे लागू कर दिया गया, लेकिन इसके रूल्स 2006 में फाइनल हुए। इन रूल्स में भी यह प्रावधान है कि यदि राज्य सरकार प्री-मेच्योर विदड्रॉल इस फंड का करना चाहती है, तो 80 फीसदी पैसा जब्त हो जाएगा। सिर्फ 20 फीसदी पैसा ही राज्य सरकार को वापस मिलेगा, इसलिए अब यह लगभग तय हो गया है कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने के सिवा ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। इस मसले में अब केंद्र सरकार के स्तर पर ही कोई फैसला अपेक्षित है।