हिमाचल के तीन उद्योगों को संजीवनी देगा निफ्ट, दो एमओयू हस्ताक्षरित

हिमाचल प्रदेश की तीन औद्योगिक इकाइयों को संजीवनी मिलने जा रहा है। प्रदेश उद्योग विभाग, कांगड़ा के निफ्ट संस्थान के माध्यम से इन इकाइयों की आर्थिकी में उड़ान लाने जा रहा है। इनमें नूरपुर सिल्क मिल, बिलासपुर और सोलन के चंबाघाट की फर्नीचर इकाइयां हैं। वर्तमान के बाजार में तीनों उद्योगों के उत्पाद पसंद किए और खरीदे जाएं, इसी मकसद से मंगलवार को कांगड़ा में निदेशक इंडस्ट्रीज राकेश प्रजापति और निदेशक निफ्ट आकाश देवांगन के मध्य दो एमओयू साइन किए गए। एमओयू साइन करने के बाद उद्योग निदेशक राकेश प्रजापति ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि तीनों इकाइयों का जीर्णोद्धार करने के लिए निफ्ट कांगड़ा के विशेषज्ञ मदद करेंगे। टाइम बांड मैनर में यह एमओयू साइन किए गए हैं।

इनमें नूरपुर सिल्क मिल को पांच साल, बिलासपुर और चंबाघाट उद्योगों को अगले एक साल तक उस स्तर पर लाने की योजना है कि प्रतियोगी बाजार में बेहतर उत्पाद मार्केट में उतारे जा सकें। इसके लिए निफ्ट कांगड़ा इन उद्योगों में मशीनरी के साथ-साथ कर्मियों को निपुण भी बनाएगा। इन उद्योगों में नई मशीनरी कैसे लगेंगी। इसकी डीपीआर निफ्ट तैयार करेगा। इसके बाद इन उद्योगों में तैयार उत्पादों की ब्रांडिंग से लेकर मार्केटिंग तक की पूरी रूपरेखा निफ्ट के माध्यम से तैयार की जाएगी। प्रजापति ने कहा कि इन तीनों उद्योगों के रिवाइवल के लिए एक इंटर्नल डीपीआर एक माह में निफ्ट के माध्यम से आ जाएगी। यह डीपीआर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्ज की बैठक में रखी जाएगी। कोशिश रहेगी कि जल्द टेंडर भी कर दिए जाएं।

निफ्ट के निदेशक आकाश देवांगन ने कहा कि प्रदेश की दो फर्नीचर फैक्ट्री और नूरपुर सिल्क मिल के जीर्णोद्धार के लिए साइन एमओयू निफ्ट के लिए बहुत अच्छा अवसर है। निफ्ट के लिए यह एक मौका है कि इन उद्योगों को घाटे से उबारा जाए। इसके साथ ही छात्रों को इंटर्नशिप करने का भी मौका मिलेगा। वहीं, स्थानीय लोगों में रोजगार के भी अवसर सृजित होंगे। उद्योग विभाग के सीनीयर मैनेजर एसपी भार्गव, डिप्टी मैनेजर राजेंद्र पाल कंधारी, नूरपुर सिल्क मिल मैनेजर लोकेश महाजन, निफ्ट के को-ऑर्डिनेटर कमल जीत, टेक्सटाइल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर सौरभ गर्ग ने एमओयू पर साइन किए।

नूरपुर सिल्क मिल की स्थापना वर्ष 1964 में पंजाब सरकार की ओर से उत्तर भारत को रेशम केंद्र के रूप में विकसित करने के मकसद से की गई थी। वर्ष 1969 में इसे हिमाचल सरकार से नाम स्थानांतरित कर दिया गया। पिछले तीन दशकों से सिल्क इडंस्ट्रीज मौजूदा दौर के उपभोक्ताओं को खींच नहीं पाई और लगातार घाटे के बोझ तले दबती चली गई। ऐसे में निफ्ट कांगड़ा को सिल्क मिल को उभारने की मिली जिम्मेवारी से मिल के उत्पाद फैशन बाजार में उतरने के पूरे आसार दिख रहे हैं।