हिमाचल के कई ब्लड बैंकों में खून की कमी, कोरोनाकाल में नहीं लगा पा रहे रक्तदान शिविर

कोरोना संकट के बीच हिमाचल के कई ब्लड बैंकों में खून का अकाल छाने लगा है। आईजीएमसी शिमला समेत प्रदेश के कई चिकित्सा संस्थानों में लोगों की जरूरत के अनुसार खून नहीं है। इसकी वजह रक्तदाताओं का कोरोना संक्रमण की वजह से चिकित्सा संस्थानों में न जाना और रक्तदान शिविरों की कमी है। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी शिमला में हमेशा की तरह इस बार भी कुछ दुर्लभ समूहों जैसे निगेटिव ग्रुप के खून की कमी है।

हालांकि, बीच-बीच में शिविर लगाकर काम चल रहा है। आईजीएमसी के एक चिकित्सक ने इसकी पुष्टि की है। इसी तरह प्रदेश के अन्य चिकित्सा केंद्रों की स्थिति है। डॉ. आरके राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके अग्निहोत्री ने कहा कि अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की व्यवस्था तो है, लेकिन कोरोना काल में रक्तदान शिविर के आयोजन न होने से कुछ विशेष ब्लड ग्रुप की कमी है।
आने वाले समय में रक्तदान शिविर के आयोजन को लेकर योजना बनाई गई है। सोलन अस्पताल के ब्लड बैंक में प्रति माह 80 से 90 यूनिट खून की आवश्यकता रहती है। लेकिन इस समय अस्पताल में केवल 10 यूनिट खून ही मरीजों की जिंदगी को बचाने के लिए बचा है। संबंधित अधिकारी डॉ. एनके गुप्ता ने कहा है कि अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की भारी कमी है। रोजाना मरीजों को खून जुटाने के लिए डोनर का सहारा लिया जा रहा है। छोटे शिविरों को लगाकर भी ब्लड की कमी को पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
रक्तदान में बिलासपुर आगे
कोविड काल में अभी तक बिलासपुर में 22 रक्तदान शिविर लग चुके हैं। इनमें 1562 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ है। 406 यूनिट अस्पताल में ही डोनेट हो चुका है। अभी तक कोरोना काल में कुल 1968 यूनिट खून वॉलंटियरों की ओर से दिया गया है, जिसके चलते जिला अस्पताल में खून की कोई कमी नहीं है।

लोगों से रक्तदान की अपील
हिमाचल प्रदेश में 107 बार खूनदान कर चुके रक्तदाता नरेश शर्मा ने लोगों से अपील की है कि वे बढ़-चढ़कर रक्तदान करें। शिमला के ठियोग के मझोली गांव के नरेश शर्मा ने पिछले हफ्ते आईजीएमसी जाकर खुद रक्तदान किया है। वह परवाणू में रहते हैं।