हिमाचल उपचुनाव विश्लेषण: कहीं भी जा सकता है मंडी का नतीजा, जुब्बल-कोटखाई ने भी चौंकाया

हिमाचल प्रदेश में उपचुनाव के लिए मतदान वाले दिन शनिवार को जिस तरह से मंडी संसदीय क्षेत्र में अन्य सीटों की अपेक्षा कम मतदान हुआ, उस पर सियासी पंडित मान रहे हैं कि यहां उपचुनाव के नतीजे कहीं भी जा सकते हैं। इसी के साथ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह मंडी संसदीय क्षेत्र में अपेक्षा से कम मतदान होना एक पहेली बन गई है। उस पर भी सीएम जयराम ठाकुर की गृह विधानसभा सीट सराज की रिकॉर्ड वोटिंग ने इसे और अबूझ बना दिया है। विधानसभा सीटों के उपचुनाव में जुब्बल-कोटखाई में हुए रिकॉर्ड मतदान ने भी सभी को चौंका दिया है। फतेहपुर और अर्की में भी जिस तरह से अच्छी मत प्रतिशतता रही है, उससे माना जा रहा है कि यहां कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी चुनौती दे दी है।

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हिमाचल प्रदेश में शनिवार को हुए चारों उपचुनाव पर दिन भर सबकी नजरें गड़ी रहीं। व्हाट्सऐस, फेसबुक आदि पर समय-समय पर मत प्रतिशतता की जानकारी साझा होती रही। प्रदेश के हर कोने में इस बारे में सुबह से ही कयास लगाए जाते रहे कि जिस तरह से वोटिंग हो रही है, उसके क्या मायने हैं। लोग अपने-अपने हिसाब से इसका विश्लेषण भी करते रहे। मसलन 12 बजे तक मंडी में 19.78, फतेहपुर में 22.27, अर्की में 24.02 और जुब्बल-कोटखाई में 27.85 फीसदी मत पड़े। दो बजे यही प्रतिशतता क्रमवार 33.17, 39.32, 39.24 और 48.19, पांच बजे 49.83, 62.40, 61.33 और 66.10 रही। जुब्बल-कोटखाई शुरू से ही आगे और मंडी पीछे चल रहा था। शाम आठ बजे तक जुब्बल-कोटखाई में मतदान प्रतिशतता 80 फीसदी पहुंचने लगी तो राजनीतिक पंडितों का कहना था कि उपचुनाव में आम तौर पर इतना ज्यादा मतदान नहीं होता है। ज्यादा मत एंटी इनकमबेंसी के भी प्रतीक होते हैं। ऐसे में जुब्बल-कोटखाई में सरकार के लिए चौंकाने वाले नतीजे भी आ सकते हैं।

मंडी में सराज के अलावा अन्य सीटों पर ज्यादा मतदान नहीं होने के भी कई मायने निकाले जा रहे हैं। इसमें भी दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं। भाजपा के लोग ज्यादा वोटों के नहीं पड़ने को जहां सरकार के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी नहीं होने से जोड़ रहे हैं और इसे कांग्रेस को झटके की तरह देख रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के अपने तर्क रहे कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह क्षेत्र मंडी में भाजपा हर क्षेत्र में अपने पक्ष में वोट डलवाने में नाकामयाब रही। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार असल में नतीजा क्या निकलेगा, इस बारे में दो नवंबर को ही सही तस्वीर मालूम होगी। मतदान की प्रतिशतता का एक सा संकेत नहीं है। दिन भर अर्की और फतेहपुर के बारे में अलग-अलग बातें होती रहीं। यहां भी भाजपा के लिए कांग्रेस की कड़ी चुनौती है।