हाय महंगाई! पांच माह के उच्चतम स्तर पर, अक्तूबर में थोक मुद्रास्फीति दर 12.54 प्रतिशत पर

ईंधन और विनिर्मित सामानों की महंगाई के चलते थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति अक्तूबर 2021 में बढ़कर पांच महीने के उच्चतम स्तर 12.54 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे पिछले माह थोक मुद्रास्फीति 10.66 प्रतिशत और  अक्तूबर 2020 में 1.3 प्रतिशत थी। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के आर्थिक सलाहकार के कार्यालय द्वारा सोमवार को जारी प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अक्तूबर में ईंधन और बिजली वर्ग में कीमतों का स्तर पिछले साल से 37.18 प्रतिशत ऊंचा रही, जबकि इस वर्ष सितंबर में इस वर्ग की थोक मुद्रास्फीति 24.81 प्रतिशत थी। इसी तरह विनिर्मित वस्तुओं के वर्ग में थोक मुद्रास्फीति 12.04 प्रतिशत रही। एक माह पूर्व इस वर्ग की वस्तुओं का सामान्य थोक मूल्य स्तर सालाना आधार पर 11.41 प्रतिशत ऊंचा था।

अक्तूबर 2021 में खाद्य वस्तुओं का थोक मूल्य सालाना आधार पर 3.06 प्रतिशत ऊंचा रहा, जबकि एक माह पूर्व इस वर्ग में सालाना आधार पर कीमतें 1.14 प्रतिशत ऊंची थीं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और जिंसों की कीमत में उछाल के साथ-साथ विनिर्माण में काम आने वाले कम्प्यूटर चिप जैसे महत्त्वपूर्ण उत्पादों और पुर्जों की आपूर्ति शृंखला में बाधा से भारत सहित विश्वस्तर पर विनिर्माण गतिविधि प्रभावित होने से कीमतों पर असर पड़ा है।

उपभोक्ताओं पर बोझ डाल सकते हैं उद्योग

विश्लेषकों का अनुमान है कि उद्योग आने वाले समय में बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं। विश्लेषकों ने महंगाई दर में इस तरह की बढ़ोतरी को चिंता का कारण बताते हुए कहा कि इससे भारतीय रिजर्व बैंक बैंकिंग प्रणाली में नकदी घटाने और नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करने के निर्णय पहले के अनुमानों की तुलना में जल्दी कर सकता है। मांग में वद्धि हो रही है, ऐसे में उत्पादक सामग्री और परिवहन की ऊंची लागतें उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर सकते हैं, यद्यपि हाल ही में पेट्रोलियम ईंधन पर टैक्स में कमी से कुछ राहत जरूरी मिलेगी।