सड़क बनाने के लिए सीएम ऑफिस से छह माह पहले भेजा पत्र, अब जाकर मिला

मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजे पत्र जिलों में डीसी दफ्तरों में नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे कई पत्र बीच रास्ते से ही गायब हो रहे हैं। ऐसे कई मामलों पर सीएम कार्यालय सख्त हो गया है। बुधवार को हुई बैठक में भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उपायुक्तों को किसी भी कोताही पर कड़ी नसीहत दी है। उन्होंने यहां तक कहा कि जिला प्रशासन सरकार का प्रतिबिंब होता है।

छह महीने में मुख्यमंत्री कार्यालय से एक उपायुक्त को सड़क निर्माण के लिए पंचायत का प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें प्रधान सचिव मुख्यमंत्री की चिट्ठी भी संलग्न थी। इसमें कहा गया था कि सेब सीजन के चलते सड़क की हालत ठीक नहीं है। लोगों को फसल मार्केट तक पहुंचाने में दिक्कत हो रही है।
सड़क की मरम्मत को फंड जारी करें। यह पत्र उपायुक्त कार्यालय से गायब कर दिया गया। फिर इस पत्र को ग्रामवासियों ने दोबारा डायरी करवाया। यह फिर भी ट्रेस नहीं हो पाया। अब वीरवार को डीसी, एसपी के सम्मेलन के दौरान ही इसे प्रधान सचिव मुख्यमंत्री के कार्यालय ने दोबारा उपायुक्त कार्यालय को फैक्स किया।
एक अन्य उपायुक्त कार्यालय ने भी इसी तरह का एक पत्र पिछले साल गायब किया था। इस बारे में तो मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत हुई थी। एक जिले के उपायुक्त कार्यालय के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह के कार्यालय से भेजा गया पत्र मिल नहीं पाया है।

पत्र में रजिस्टर्ड पोस्ट लिखा गया, जबकि इसे साधारण डाक से भेजा गया तो यह नहीं मिला। ऐसे मामले कई उपायुक्त कार्यालयों में दर्ज किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे तमाम मामलों का कड़ा संज्ञान लिया जा रहा है।