संघर्ष भरा रहा नरेंद्र बरागटा का पंचायत प्रधान से कैबिनेट मंत्री पद तक का सफर

पंचायत प्रधान से कैबिनेट मंत्री के पद तक पहुंचे नरेंद्र बरागटा का राजनीतिक सफर शुरू से ही चुनौती भरा रहा। गांव में पंचायत प्रधान का चुनाव जीतने के बाद मंत्रिमंडल तक के सफर में नरेंद्र बरागटा के सामने कई चुनौतियां रहीं। इसी बीच बरागटा ने जुब्बल कोटखाई में साठ साल पुराने कांग्रेस के गढ़ में जीत दर्ज कर नया इतिहास भी रचा था। नरेंद्र बरागटा ने पहला चुनाव 1993 में जुब्बल कोटखाई से लड़ा लेकिन इस चुनाव को जीतना रामलाल ठाकुर के साथ उनके लिए बड़ी चुनौती था इसलिए हार का सामना करना पड़ा। अगले विधानसभा चुनाव 1998 में शिमला से लड़े यहां से जीत हासिल की।

साथ में बागवानी और तकनीकी शिक्षा मंत्री पद मिल गया। तीसरा विधानसभा चुनाव  2003 में जुब्बल कोटखाई से लड़ा लेकिन इसमें कांग्रेस के रोहित ठाकुर से हार मिली। चौथा चुनाव 2007 में फिर जुब्बल कोटखाई से लड़ा जिसमें उनको जीत हासिल हुई। फिर  कैबिनेट स्तर का पद मिला। धूमल सरकार में वह एक प्रभावशाली मंत्रियों की सूची में गिने जाते थे।  पांचवां चुनाव 2012 में फिर जुब्बल कोटखाई से लड़ा पर उसमें फिर हार गए। 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद प्रदेश सरकार में अभी तक मुख्य सचेतक पद पर थे। प्रशासनिक अमले पर उनके तेज तरार स्वभाव के कारण पूरी पकड़ थी। खासकर बागवानी के क्षेत्र में बरागटा ने अपने कार्यकाल में नए आयाम स्थापित किए। सरकार में रहकर भी बागवानों के लिए अपनी बुलंद आवाज आखिर तक उठाते रहे।