श्रमदान, अंशदान और फंड ने बदला भौण कडियाणा स्कूल का नक्शा

नाहन (सिरमौर)। शिक्षक और अभिभावक चाहें तो अपने प्रयासों से बच्चों के साथ-साथ शिक्षण संस्थान की भी तकदीर लिख सकते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है राजकीय प्राथमिक पाठशाला भौण कडियाणा स्कूल के शिक्षक और स्कूल प्रबंधन समिति ने।
यहां शिक्षक और अभिभावकों ने स्कूल के प्रति अपना समर्पण दिखाते हुए अंशदान, श्रमदान और फंड से मिली राशि से स्कूल भवन का नक्शा ही बदल दिया है। जानकारी अनुसार समग्र शिक्षा अभियान की ओर से पाठशाला भवन की मरम्मत के लिए छह लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। स्कूल के कमरों की खस्ता हालत को देखते हुए शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन समिति ने मरम्मत की बजाय खस्ताहाल कमरों को गिराकर नए कमरे बनाने का फैसला लिया। अभिभावकों ने अतिरिक्त कार्य में जहां श्रमदान का निर्णय लिया। वहीं, जेबीटी अध्यापक सुरेश शर्मा ने सीमेंट, बजरी और रेत का खर्च उठाने की बात कही।

बस फिर क्या था, पाठशाला को सुधारने का कार्य शुरू हुआ। स्कूल में बने जर्जर तीन कमरों को गिराकर नए स्वरूप में ढाला गया। जबकि, एक कमरे के अलावा शौचालय और रसोई घर की दशा को भी मरम्मत करके सुधारा गया। इस कार्य को पूरा करने में जेबीटी अध्यापक सुरेश शर्मा ने सीमेंट, रेत और बजरी के लिए डेढ़ लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाया।
वहीं, अभिभावकों ने भी पुराने कमरों को गिराने, छत डालने के कार्य में सहयोग के साथ बीच-बीच में मजदूरी और मिस्त्री के कार्य में भी श्रमदान किया। जानकारों की मानें तो यदि अंशदान और श्रमदान न होता तो इसका खर्च 10.30 लाख आता।
बीआरसीसी प्राथमिक संगड़ाह मायाराम शर्मा ने पाठशाला का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के शिक्षण कार्य का भी जायजा लिया। सभी बच्चों का शैक्षणिक स्तर अच्छा पाया गया। हर साल यहां से किसी न किसी छात्र का चयन जेएनवी के लिए भी हो रहा है। उन्होंने भवन सुधार के लिए शिक्षक सुरेश शर्मा और स्कूल प्रबंधन समिति के प्रयासों की भी सराहना की। संवाद