शिमला: पुस्तकें लेने से पहले ही फर्म को जारी किए थे 15 लाख

पुस्तक खरीद मामले में समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय पर वर्ष 2018-19 में भी सवाल उठ चुके हैं। विभाग के आंतरिक आडिट में खुलासा किया गया कि एक फर्म पर मेहरबानी करते हुए उसे पुस्तकों की सप्लाई मिलने से पहले ही करीब 15 लाख रुपये की अग्रिम राशि जारी कर दी गई। इस बड़े खेल पर आडिटर ने आपत्ति लगाते हुए कि लिखा कि फर्म को एडवांस में पैसा जारी करना समझ से परे है। फर्म के साथ सप्लाई देने में देरी करने को लेकर शर्तें भी तय नहीं की गई। देरी करने पर जुर्माने की राशि का प्रावधान भी नहीं किया गया। पुस्तकों की समय से सप्लाई करने के लिए फर्म के साथ संपर्क भी नहीं साधा गया।

उधर, प्रदेश के सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों की लिए खरीदी जाने वाली पुस्तकों को लेने के लिए डिस्काउंट की राशि को शिक्षा विभाग बढ़ाएगा। विवादित हुई करीब आठ करोड़ रुपये की पुस्तक खरीद प्रक्रिया में अब 35 फीसदी तक डिस्काउंट लेने का प्रावधान किया जाएगा। कुछ प्रकाशकों ने शिक्षा विभाग पर मात्र दस फीसदी डिस्काउंट पर किताबें खरीदने का आरोप लगाया है। उधर, पुस्तकों की खरीद के लिए चयनित 49 कंपनियों के जीएसटी, पैन नंबर और इन्कम टैक्स रिटर्न की जांच शुरू हो गई है। समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक को सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। शिक्षा सचिव राजीव शर्मा ने बताया कि इस मामले को लेकर विचार चल रहा है। जल्द ही डिस्काउंट राशि को लेकर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।

आरोप लगाने वालों पर हो कार्रवाई : संजीव
समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय की पुस्तक खरीद प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच राष्ट्रीय प्रकाशक संघ विभाग के समर्थन में आ गया है। पुस्तक खरीद प्रक्रिया को गलत तरीके अपना कर बाधित करने वाले संघों पर सरकार से कार्रवाई करने की मांग की है। संघ के महामंत्री संजीव अग्रवाल ने कहा है कि अखिल भारतीय प्रकाशक संघ और मध्य भारत हिंदी प्रकाशक संघ ने विभागीय अधिकारियों को डरा धमकाकर अपनी पुस्तकों के क्रय आदेश प्राप्त करने की मंशा से आरोप लगाए हैं। यह संघ पुस्तक माफिया के रुप में काम करती है। एक भी प्रतिष्ठित प्रकाशक इन तथाकथित संघ में सदस्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, बिहार में पुस्तक खरीद की प्रक्रिया में इन संघों ने इसी तरह आरोप लगाकर प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया है। संजीव अग्रवाल ने कहा कि इन तथाकथित संघ के पदाधिकारियों के एक ही पते पर कई फर्में पंजीकृत हैं।