वीरभद्र सिंह: 13 साल की उम्र में राजगद्दी संभालने वाला राजा, 15 तस्वीरों से समझिए उनके जिंदगी के सफर को

13 वर्ष की आयु में बुशहर रियासत की राजगद्दी संभालने वाले पहले राजा वीरभद्र सिंह थे। बुशहर रियासत के राजा पदमदेव सिंह के निधन के बाद वर्ष 1947 में वीरभद्र सिंह ने राजगद्दी संभाली थी। आजाद भारत में जहां राजशाही प्रथा समाप्त हो गई थी, बावजूद इसके राजा वीरभद्र सिंह का परंपराओं के तहत राजतिलक किया गया था। हिमाचल प्रदेश की राजनीति का अविसमरणीणय चेहरा अब हमारे बीच नहीं रहा। आजाद भारत में राजशाही प्रथा समाप्त होने के बाद भी राजगद्दी संभालने के साथ-साथ वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश की कमान छह बार बतौर मुख्यमंत्री कमान संभाली। कृष्ण वंश के 122वें राजा वीरभद्र सिंह ने प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में काफी बड़ी भूमिका अदा की। बुशहर रियासत की शान वीरभद्र सिंह का जन्म 1934 में शोणितपुर जिसे वर्तमान समय में सराहन के नाम से जाना जाता है में हुआ था। देवी देवताओं की अनुकंपा में वीरभद्र सिंह का जीवनकाल आगे बढ़ा।

वर्ष 1947 में राजा पदमदेव का देहांत होने के बाद वीरभद्र सिंह को बुशहर रियासत की राजगद्दी संभाली गई थी। राज परिवार का इतिहास रहा है कि राजा के अंतिम संस्कार से पूर्व राजगद्दी संभालने वाले राजकुमार का राजतिलक विधि-विधान के साथ किया जाता है।

शनिवार को रामपुर में वीरभद्र सिंह का अंतिम संस्कार होगा। इससे पूर्व उनके वारिस टीका विक्रमादित्य सिंह का राजतिलक किया जाएगा और उन्हें राजगद्दी पर बिठाने के बाद वीरभद्र सिंह का रामपुर में अंतिम संस्कार किया जाएगा।

उनके निधन की सूचना मिलते ही समूची रामपुर रियासत में शोक की लहर दौड़ गई है। राज दरबार परिसर में उनके समर्थक सुबह से ही जुटना शुरू हो गए थे।

वीरभद्र सिंह का विवाह दो बार हुआ। 20 साल की उम्र में जुब्बल की राजकुमारी रतन कुमारी से उनकी पहली शादी हुई। लेकिन कुछ वर्षों बाद ही रतन कुमारी का देहांत हो गया। इसके बाद 1985 में उन्होंने प्रतिभा सिंह से शादी की। प्रतिभा सिंह भी मंडी से सांसद रह चुकी हैं। वीरभद्र और प्रतिभा के पुत्र विक्रमादित्य सिंह भी वर्तमान में शिमला ग्रामीण से विधायक हैं।