लाहौल में बना हिमाचल का पहला मड हाउस संग्रहालय

सांस्कृतिक टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए घाटी के युवाओं ने केलांग में हिमाचल प्रदेश का पहला मड हाउस संग्रहालय तैयार किया है। करीब 80 साल पुराने मड हाउस का जीर्णोद्धार कर इसे संग्रहालय में तबदील किया गया है। इसमें दशकों पहले जनजातीय लोग जिन रोजमर्रा की वस्तुओं का इस्तेमाल करते थे, उन्हें संजो कर रखा गया। संग्रहालय में रोजमर्रा की कई ऐसी वस्तुएं रखी हैं, जिनके नाम युवा पीढ़ी भूल चुकी है। डुक्पा संप्रदाय के अवतारी लामा थुकसे रिंपोंछे ने इस संग्रहालय का शुभारंभ कर सैलानियों के लिए खोल दिया है। इसमें केलांग के युवक तंजिन बौद्ध, झारखंड के संजीवन रॉय और चंडीगढ़ की पल्लवी की बड़ी भूमिका रही है। युवाओं ने बाकायदा लाइफ एंड हेरिटेज ऑफ लाहौल नाम से एक संस्था भी पंजीकृत करवाई है।

संग्रहालय में आठ कमरे हैं। 70 वर्षीय अंगरूप ने पूर्वजों के इस घर को संग्रहालय के लिए दान किया है। तंजिन और संजीवन ने लद्दाख से नरोपा फेलोशिप के तहत मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। तंजिन ने कहा कि लद्दाख में पुरातन धरोहरों को संरक्षित कर जिस तरह सांस्कृतिक टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है, उससे प्रेरित होकर उन्होंने लाहौल में भी मड हाउस संग्रहालय शुरू करने का मन बनाया। पल्लवी ने कहा कि हिमालयन क्षेत्र में पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का ख्याल उन्हें इस प्रोजेक्ट में भागीदार बनने के लिए प्रेरित किया। संजीवन ने कहा कि जनजातीय इलाकों में भी विकास के साथ लोग अपनी परंपरा और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। इस तरह की पहल संस्कृति के संरक्षण और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए वरदान साबित होगी।

अद्वितीय है मड हाउस संग्रहालय का वैभव
अवतारी लामा थुकसे रिंपोंछे ने कहा कि कोई भी चीज बाहरी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है। कंक्रीट से निर्मित आलीशान भवन शहरों के अलावा गांव में देखने को मिल जाते हैं, लेकिन इस तरह के मड हाउस दुर्लभ हैं।