लंबे समय से खोए हुए पुराने हिमाचली गीतों को वापस ला रहा ‘तिवरा’

हिमाचल प्रदेश के लोक बैंड तिवरा आज की पीढ़ी को आधुनिक संगीत का अनुभव दे रहा है। लंबे समय से खोए हुए पुराने पहाड़ी गीतों को वापस ला रहा ‘तिवरा’ लोगों का खूब मनोरंजन कर रहा है। युवा कलाकारों आदित्या ठाकुर और सिद्धार्थ वर्मा ने वर्ष  2017 में इस बैंड की स्थापना की। तिवरा बैंड ने यूट्यूब पर अब तक आठ वीडियो अपलोड किए हैं और वे संगीत के मूल रूप में राज्य के पुराने लोक गीतों की विरासत को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

तिवरा हिमाचल की विरासत को पुनर्जीवित कर रहा है और लंबे समय से खोए हुए पुराने पहाड़ी गीतों को वापस ला रहा है, लोगों को अपनी वर्तमान जड़ों से परिचित करवाने के मकसद से पहाड़ी लोक धुनों को फिर से बनाकर अपनी सांस्कृतिक से जोड़ रहा है ।

प्रदेश में अपनी पृथक पहचान बना रहे तिवरा बैंड के कलाकार आदित्य और सिद्धार्थ हिमाचल प्रादेश विश्वविद्यालय से पर्यटन में स्नातकोत्तर कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने तिवरा बैंड की बुनियाद रखी। आदित्य का कहना है कि उन्होंने हिमाचल के लोक गीतों का उपयोग शुरू किया। वह कांगड़ा के बीड़ बिलिंग से संबंध रखते हैं। उनके पिता कांगड़ा और मां कुल्लू से हैं।
उनके भाई भी संगीत से जुड़े रहे और उनकी मांग भी संगीत की शौकीन रहीं। उन्होंने संगीत का ज्ञान हासिल किया और यह जाना कि कैसे संगीत में बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने डोगरी ,कांगड़ी, चंबयाली व कुल्लवी बोलियों का इस्तेमाल किया। सिद्धार्थ वर्मा कुल्लू से संबंध रखते हैं और वह गिटारवादक हैं। उनके साथ ही मोहन चौहान कैमरे के साथ काम करते हैं और सिद्धार्थ स्वयं वीडियो संपादन कर यूट्यूब पर अपलोड करते हैं।