मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने देव पालकियों को कंधा देकर मेले के शुभारंभ की परंपरा को निभाया

मां-बेटे के मिलन का प्रतीक अंतरराष्ट्रीय रेणुकाजी मेला शनिवार से श्रद्धा व उल्लास के साथ आरंभ हो गया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने देव पालकियों को कंधा देकर मेले के शुभारंभ की परंपरा को निभाया। साथ ही देव पालकियों को रवाना करके शोभायात्रा की अगुवाई भी की। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने क्षेत्रवासियों को रेणुका मेले की बधाई देने के साथ ही उनके सुखमय जीवन की कामना भी की।

शोभायात्रा के साथ ही सात दिन तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय रेणुकाजी मेला का आगाज हुआ। शोभायात्रा शनिवार दोपहर बाद स्थानीय खेल मैदान से शुरू होकर ददाहू बाजार, गिरिपुल, बेडोन, देवशीला, मेला मैदान से होती हुई शाम ढलने से पूर्व रेणुकाजी तीर्थ के त्रिवेणी घाट पर पहुंची। यहां मां रेणुकाजी व पुत्र परशुराम का पारंपरिक मिलन करवाया गया। इस ऐतिहासिक मिलन के साक्षी बनने के लिए सैकड़ों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। शोभायात्रा पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों के साथ-साथ शंख, ढोल-नगाड़ों सहित बैंड बाजों के साथ निकाली गई। भगवान परशुराम के जयघोष से माहौल भक्तिमय हो गया।

शोभायात्रा में भगवान परशुराम के प्राचीन जामू मंदिर, कटड़ा मंदिर, महासू व मंडलाह के मंदिरों से लाई गईं पालकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। भगवान परशुराम व मां रेणुका की झलक दिखाती भव्य झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही। देवताओं के साथ आए देवलु हाथों में झंडे (निशान) लिए शोभायात्रा के आगे चल रहे थे। इसके साथ ही पुलिस व होमगार्ड बैंड की धुन भी शोभायात्रा में चार चांद लगा रही थी।

परंपरा निभाने पहुंचा राजघराना 
रेणुकाजी मेले की सदियों पुरानी परंपरा को निभाने राज परिवार के वंशज शनिवार को रेणुकाजी पहुंचे। दशकों पूर्व नाहन रियासत के राजा या उनके प्रतिनिधि भी भगवान परशुराम का स्वागत करने रेणुका आया करते थे। शनिवार को भी राज परिवार के वंशज व वरिष्ठ सदस्य कंवर अजय बहादुर सिंह के नेतृत्व में गिरी नदी के पावन तट पर पहुंचे। यहां उन्होंने जामू मंदिर से लाई गई भगवान परशुराम की पालकी का स्वागत करके उन्हें विधिवत व मंत्रोच्चारण के बीच पंडाल तक पहुंचाया। इस मौके पर उनके संघ राज परिवार के वंशज कंवर पुष्पेंद्र सिंह, कंवर मंजीत सिंह, कंवर कुलदीप सिंह, कंवर आदेश, कंवर बलभद्र, पंडित रमेश मिश्रा व योगेश गुप्ता सहित परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

देवताओं को करना पड़ा मुख्यमंत्री का इंतजार
अंतरराष्ट्रीय रेणुकाजी मेले की परंपरा में इस वर्ष बदलाव दिखाई दिया। यहां देवताओं को मुख्यमंत्री का इंतजार करना पड़ा। शोभायात्रा तीन बजे के करीब ददाहू के खेल मैदान से प्रारंभ हुई। जबकि देवताओं की रवानगी के लिए करीब डेढ़ बजे का समय निर्धारित था। मुख्यमंत्री करीब डेढ़ घंटे पश्चात पंडाल में पहुंचे। मान्यता है कि देवता किसी भी अतिथि का इंतजार नहीं करते। उन्हें सांझ ढलने से पूर्व रेणुका पहुंचना होता है। लेकिन इस मर्तबा देवताओं को करीब डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा।