मन की बात कार्यक्रम: प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से कोविड का टीका लगवाने की अपील की

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सभी से कोविड-19 टीका लगाने की अपील की है। आकाशवाणी पर मन की बात कार्यक्रम में देशवासियों के साथ अपने विचार साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी के लिए यह गर्व की बात है कि भारत में विश्‍व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। उन्‍होंने कहा कि सौ वर्ष से अधिक उम्र के बहुत से लोगों ने टीके लगवाये हैं और घर के बुजुर्गों में टीके के प्रति उत्‍साह स्‍पष्‍ट रूप से नजर आता है।  मोदी ने कहा कि सभी को कोरोना से लड़ने का मंत्र याद रखना चाहिए कि दवाई भी, कड़ाई भी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले वर्ष मार्च में देशवासियों ने पहली बार जनता कर्फ्यू शब्‍द सुना और लोगों ने अनुशासन का ऐसा अभूतपूर्व उदाहरण पेश किया है जिसपर भावी पीढि़यां निश्चित रूप से गर्व करेंगी। लोगों ने थाली बजाकर, ताली बजाकर और दीये जलाकर हमारे कोरोना योद्धाओं के प्रति सम्‍मान और आदर व्‍यक्‍त किया और ये बात कोरोना योद्धों के मन को छू गई। इन कोरोना योद्धाओं ने देश के सभी नागरिेकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अथक और निस्‍वार्थ सेवा की।

प्रधानमंत्री ने स्‍मरण किया कि स्‍वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिए अमृत महोत्‍सव उसी दिन से शुरू किया गया था जिस दिन डांडी मार्च शुरू हुआ था। यह महोत्‍सव 15 अगस्‍त 2023 तक जारी रहेगा। उन्‍होंने लोगों से आग्रह किया कि अमृत महोत्‍सव के माध्‍यम से किसी भी स्‍वाधीनता सेनानी की संघर्ष गाथा, किसी स्‍थान के इतिहास और सांस्‍कृतिक महत्‍व को सामने लाकर देशवासियों को उससे जोड़ा जा सकता है। श्री मोदी ने स्‍वतंत्रता संग्राम के दौरान स्‍वतंत्रता सेनानियों को सामने आई दिक्‍कतों के बारे में लोगों को बताया । उन्‍होंने कहा कि उनके बलिदान की अमरगाथा लोगों को कर्तव्‍य के पथ पर अग्रसर करती रहेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी स्‍वतंत्रता के अमृत महोत्‍सव का अर्थ है कि हम नये संकल्‍प करें और उन संकल्‍पों को पूरा करें तथा अपनी स्‍वतंत्रता को पूरी ईमानदारी के साथ संजोकर रखें। हमें समाज के कल्‍याण, देश के हित और उज्‍जवल भविष्‍य के लिए कार्य करते रहना चाहिए। हमारा संकल्‍प नागरिकों के कर्तव्‍यों और दायित्‍वों के अनुसार होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महीने महिला दिवस महत्‍वपूर्ण रहा है इस मौके पर कई महिला खिलाडि़यों ने पदक जीते और कई रिकार्ड अपने नाम किये। उन्‍होंने मिताली राज का उदाहरण दिया जो अंतर्राष्‍ट्रीय क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी बनी हैं। इस उपलब्धि पर उन्‍हें बधाई देते हुए श्री मोदी ने कहा कि दो दशक से अधिक समय के करियर में मिताली राज ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है। श्री मोदी ने कहा कि उनके कठोर परिश्रम और सफलता की गाथा, महिला क्रिकेटरों के लिए ही नहीं बल्कि पुरूष क्रिकेट खिलाडि़यों के लिए भी एक प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री ने दिल्‍ली में आयोजित निशानेबाजी विश्‍वकप में भारत के उत्‍कृष्‍ठ प्रदर्शन की सराहना की। इस प्रतियोगिता में भारत ने सबसे ज्‍यादा स्‍वर्ण पदक जीते। श्री मोदी ने कहा कि भारत के महिला और पुरूष निशानेबाजों के शानदार प्रदर्शन की वजह से ही यह संभव हो पाया। प्रधानमंत्री ने बी.डब्‍ल्‍यू.एफ. ओपन सुपर 300 टूर्नामेंट में रजत पदक जीतने वाली पी.वी. सिंधू का भी जिक्र किया। श्री मोदी ने कहा कि हमारे लिए ये गर्व की बात है कि आज देश की बेटियां शिक्षा से लेकर उद्यमिता तक, सशस्‍त्र बलों से लेकर विज्ञान और प्रोद्योगिकी हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।

प्रधानमंत्री ने जीवन के हर क्षेत्र में नयापन और आधुनिकता लाने की बात करते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो कई बार हमें बोझ महसूस होता है। इसी संदर्भ में उन्‍होंने कहा कि भारत के कृषि क्षेत्र में आधुनिकता भी समय की मांग है। उन्‍होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में रोजगार के नये अवसर पैदा करने, किसानों की आय बढ़ाने के लिए परंप‍रागत कृषि के साथ ही नये विकल्‍पों को अपनाना भी जरूरी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने श्‍वेत क्रांति के दौरान इसे महसूस किया है। अब मधुमक्‍खी पालन भी ऐसा ही एक विकल्‍प बनकर उभर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मधुमक्‍खी पालन देश में शहद क्रांति या मीठे आंदोलन का आधार बना रहा है। उन्‍होंने पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग के गुरदुम गांव का उदाहरण दिया जहां ऊंची चट्टानों और भौगोलिक समस्‍याओं के बावजूद लोगों ने मधुमक्‍खी पालन शुरू किया है। आज इस स्‍थान पर बने शहद की अच्‍छी मांग है। इससे किसानों की आय भी बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के सुन्‍दरबन क्षेत्र के प्राकृतिक जैविक शहद की देश में और विश्‍व में बहुत अधिक मांग है। गुजरात के बनांसकांठा और हरियाणा के यमुना नगर के किसान शहद के माध्‍यम से लाखों रूपये वार्षिक कमा रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि किसानों की कड़ी मेहनत के कारण ही शहद के उत्‍पादन में व‍ृद्धि हुई है। हर वर्ष लगभग सवा लाख टन शहद का उत्‍पादन किया जाता है और बड़ी मात्रा में शहद का अन्‍य देशों को निर्यात भी किया जा रहा है। शहद के अलावा मधुमक्‍खी के छत्‍ते से मिलने वाला मोम भी आय का एक मुख्‍य स्रोत है। प्रधामनंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारत मधुमक्‍खी के छत्‍ते से मिलने वाले मोम का आयात करता है लेकिन हमारे किसान बहुत तेजी से इस स्थिति को बदल रहे हैं और एक प्रकार से आत्‍मनिर्भर भारत अभियान में योगदान कर रहे हैं। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि देश में अधिक से अधिक किसानों को अपनी खेती के साथ-साथ मधुमक्‍खी पालन भी करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से लाइट हाउस अनूठे होते हैं और उनकी भव्‍य संरचना हमेशा से ही लोगों को आकर्षित करती रही है। उन्‍होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देश में 71 लाइट हाउस की पहचान की गई है। इन लाइट हाउस में उनकी क्षमता के अनुसार संग्रहालय, एम्‍फी थियेटर, ओपन एयर थियेटर, कैफेटेरिया, चिल्‍ड्रन्‍स पार्क, पारिस्थितिकी के अनुकूल कॉटेज और लैंड स्‍केपिंग से सु‍सज्जित किया जायेगा।

श्री मोदी ने जापान में 10 वर्ष पहले आई सुनामी और भारत में 2004 में आई सुनामी में जान गंवा चुके परिश्रमी लाइटकीपर्स को श्रद्धांजलि दी। भारत में सुनामी में लाइट हाउस के 14 कर्मचारियों की मृत्‍यु हो गई थी।

विश्‍व गौरैया दिवस का उल्‍लेख करते हुए श्री मोदी ने बताया कि वाराणसी में इन्‍द्रपाल सिंह बत्रा ने एक अनूठा प्रयास करते हुए अपने घर को गौरैया का आशियाना बना दिया है। उन्‍होंने अपने घर में लकड़ी के ऐसे घोंसले बनवाये हैं जिनमें गौरैया आसानी से रह सके। आज बनारस के कई घर इस अभियान से जुड़ रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि प्रकृति, पर्यावरण, पशु और पक्षियों के लिए हम जो कुछ भी कर सकते हैं, हमें करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने ओडि़शा से केन्‍द्रपाड़ा के बिजय कुमार काबी का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने 12 साल में गांव के बाहर समुद्र की तरफ 25 एकड़ का मैनग्रोव का जंगल खड़ा कर दिया है। श्री मोदी ने अमरेश सामंत के बारे में भी बात की जो कई गांवों की रक्षा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के कोयम्‍बतूर में बस कंडक्‍टर के तौर पर काम करने वाले मरिमुथु योगनाथन का भी उल्‍लेख किया। योगनाथन अपनी बस के यात्रियों को टिकट देते समय निशुल्‍क एक पौधा भी देते हैं और उन्‍होंने असंख्‍य पेड़ लगाये हैं।

श्री नरेन्‍द्र मोदी ने केरल में कोच्चि के सेंट टेरेसा कॉलेज के छात्रों का उदाहरण दिया जो बहुत ही रचनात्‍मक तरीके से रि-यूजेबल खिलौने बना रहे हैं। वे पुराने कपड़ों, लकड़ी के बेकार पड़े टुकड़ों, थैलों और डिब्‍बों से खिलौने बना रहे हैं। ये खिलौने आंगनवाड़ी बच्‍चों को खेलने के लिए दिये जाते हैं। उन्‍होंने कहा कि आज भारत खिलौनों के निर्माण में काफी आगे बढ़ रहा है और वेस्‍ट से वैल्‍यू के ऐसे अभियान, अभिनव प्रयोग बहुत मायने रखते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आंध्रप्रदेश में विजयवाड़ा के प्रो. श्रीनिवास पदकांडला का उल्‍लेख किया जिन्‍होंने ऑटोमोबाइल स्‍क्रैप से मूर्तियां बनाई हैं। प्रधानमंत्री ने इसे इलैक्‍ट्रॉनिक और ऑटोमोबाइल कचरे की रि-साइक्लिंग का अनूठा प्रयोग बताते हुए आशा व्‍यक्‍त की कि और भी लोग इस तरह के प्रयोग करेंगे।

श्री मोदी ने कहा कि हमें अपनी अपार सांस्‍कृतिक धरोहर को समृद्ध बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी और नई पी‍ढ़ी को भी इसका महत्‍व बताना होगा। उन्‍होंने असम के कार्बी आंगलोंग जिले के सिकारी टिस्‍सौ का जिक्र करते हुए बताया कि वह पिछले 20 वर्ष से कार्बी भाषा का प्रलेखन कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आकाशवाणी के मन की बात कार्यक्रम के माध्‍यम से देश के अधिकांश लोगों तक पहुंचने का मिशन शुरू किया है क्‍योंकि देश के दूर-दराज इलाके और ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीविजन की सुविधा उपलब्‍ध नहीं है। बेहद लोकप्रिय इस रेडियो कार्यक्रम की पहली कड़ी का प्रसारण 3 अक्‍टूबर 2014 को हुआ था। आज इसकी 75वीं कड़ी में प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम के माध्‍यम से लोगों के साथ अपने विचार साझा किये।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी नई शुरूआत हमेशा ही विशेष होती है और नई शुरूआत का अर्थ होता है- नई संभावनाएं, नए प्रयास। श्री मोदी ने कहा कि नये प्रयासों का अर्थ होता है नई ऊर्जा और नया उत्‍साह और यही कारण है कि विभिन्‍न राज्‍यों और क्षेत्रों में किसी भी नई शुरूआत को मनाने की परंपरा रही है और हमारी संस्‍कृति, विविधता से परिपूर्ण है। उन्‍होंने लोगों को होली, उगाड़ी, तमिल पुथंडू, गुडी पड़वा, बिहू, नवरेह, पोइला बोईशाख, बैसाखी और विशु, नवरात्रि, रामनवमी, ईस्‍टर और अंबेडकर जयंती की बधाई दी।

मन की बात कार्यक्रम की आज 75 कडि़या पूरी होने पर प्रधानमंत्री ने इसे सफल बनाने, इसमें योगदान करने और जुड़े रहने के लिए सभी श्रोताओं का धन्‍यवाद किया। श्री मोदी ने कहा कि इन 75 कडि़यों के दौरान असंख्‍य विषयों पर चर्चा की गई।