मंत्री रहते जीएस बाली की वीरभद्र सिंह से कई मसलों पर थी खटास, फिर भी बनाई अलग पहचान

 हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के देहांत के 113 दिन बाद कांग्रेस ने एक और कद्दावर नेता को खो दिया है। आठ जुलाई को वीरभद्र सिंह का देहांत हुआ था। 29 अक्तूबर को कांग्रेस ने दूसरे बडे़ नेता के रूप में जीएस बाली को खो दिया। तत्कालीन सीएम से उनकी कई मसलों पर खटास रही। हालांकि, अपने विभाग से संबंधित काम करवाने के लिए वह नरम भी हो जाते थे। बाली कांग्रेस सरकार में तेजतर्रार मंत्री रहे हैं। उन्हें कई बड़े फैसलों के लिए जाना जाएगा। बाली हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के बडे़ नेताओं में गिने जाते थे। सबसे बड़े जिला कांगड़ा से भी वह कांग्रेस के बड़े नेता थे।

शुरू में उनके वीरभद्र सिंह के साथ अच्छे संबंध थे। बाद में जब प्रदेश में धूमल सरकार थी तो बाली पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के समानांतर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में भी शुमार हुए। फिर जब वर्ष 2012 में वीरभद्र सरकार सत्ता में आई तो बाली को उन्होंने परिवहन और खाद्य आपूर्ति जैसे विभागों का जिम्मा दिया। अपने विभागों से संबंधित मांगें मनवाने के लिए बाली अपने सीएम से भी भिड़ जाते थे। वीरभद्र कैबिनेट की कई बैठकों में बाली तल्ख नजर आए। हालांकि, वीरभद्र से कई मसलों पर खटास रहने के बावजूद वह अपने काम को करवाने के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष नरम भी होते रहे, जिसे उनकी कूटनीतिक माना जाता था। अफसरशाही पर उनकी मजबूत पकड़ थी।

विक्रमादित्य के खिलाफ बेटे को खड़ा किया युकां चुनाव में
जीएस बाली अपने बेटे रघुवीर सिंह बाली को भी सियासत में आगे लाने के लिए संघर्षरत रहे। वीरभद्र सरकार के समय में विक्रमादित्य सिंह ने युवा कांग्रेस का चुनाव लड़ा उनके खिलाफ जीएस बाली ने अपने पुत्र रघुवीर सिंह बाली को चुनाव में उतारा। इस दौरान भी वीरभद्र और बाली के संबंधों में खटास आई।

रघुवीर सिंह बाली संभाल सकते हैं बाली की सियासी विरासत
जीएस बाली के पुत्र रघुवीर बाली अपने पिता की सियासी विरासत संभाल सकते हैं। वह सुखविंद्र सुक्खू के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रहते प्रदेश कांग्रेेस कमेटी के सचिव बन गए थे। नगरोटा बगवां में जीएस बाली चुनाव हार गए थे। पिछले कुछ अरसे से अस्वस्थ होने से भी पार्टी के क्रियाकलापों को बहुत वक्त नहीं दे पा रहे थे।

होर्डिंग में फोटो न लगाने पर वीरभद्र समर्थकों के निशाने पर इस बार भी रहे बाली
मई 2021 में वीरभद्र सिंह के मुख्यमंत्री रहते प्रदेश भर में कांग्रेस पार्टी ने होर्डिंग लगाए। इनमें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर, पूर्व मंत्री जीएस बाली, शिमला शहरी कांग्रेस के अध्यक्ष यशवंत छाजटा आदि के फोटो लगाए गए। इसमें छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह का फोटो नहीं था। इस पर बवाल खड़ा हो गया। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पूर्व मंत्री जीएस बाली के फोटो बहुत बड़े थे। अन्य राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेताओं के छोटे फोटो लगाए। इस पर वीरभद्र खेमे के कार्यकर्ता भड़क उठे। उन्होंने पोस्टर फाडे़। होर्डिंग में पूर्व मंत्री जीएस बाली के मुंह पर कालिख पोती गई। बाद में पूर्व मंत्री जीएस बाली ने ही यू-टर्न लेते हुए दूसरे होर्डिंग भेजे, जिनमें वीरभद्र सिंह का फोटो तो था, पर उनके अपने फोटो से छोटा था। यह मुद्दा भी काफी विवादित रहा।