भूगोल की अनिवार्यता में फंसी 211 की नौकरी, 13 फीसदी स्कूलों में ही पढ़ाया जा रहा विषय

प्रदेशभर में पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके 211 भूगोल प्रवक्ताओं के लिए नौकरी का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल और कॉलेज में भुगोल के वैकल्पिक विषय होने से इन्हें नौकरी का अवसर नहीं मिल पा रहा है। यह सभी प्रवक्ता नेट और सेट की परीक्षाएं उत्तीर्ण कर चुके हैं। मौजूदा समय में प्रदेश में महज 13 फीसदी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयोंं में भूगोल विषय की शिक्षा दी जा रही है। अब भूगोल विषय से जुड़े शिक्षक इसे अनिवार्य बनाने की कवायद में जुटे हैं। इस कवायद को पूरा करने के लिए एसोसिएशन का गठन कर पंचायतों से प्रस्ताव पारित करवाए जा रहे हैं। इनमें पंचायत की परिधि में आने वाले वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में भुगोल विषय को अनिवार्य बनाने की बात कही है। प्रदेश भर में 2000 से अधिक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल हैं।

आगामी दो माह में भूगोल विषय के शिक्षक और प्रवक्ता पंचायत की बैठकों में इस विषय को पहुंचाएंगे। कोरम पास होने के बाद इसे राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के सुपुर्द किया जाएगा। शिक्षकों ने डेढ़ हजार स्कूलों तक पहुंच बनाने की तैयारी की है। सरकार विषय को अनिवार्य बनाने के संबंध में निर्णय नहीं लेती है तो यह सभी शिक्षक कोर्ट जाने से भी परहेज नहीं करेंगे। उधर, विवि में भूगोल विषय के अध्यक्ष डा. बीएल ठाकुर ने कहा कि यह सामाजिक जरूरत का विषय है। प्रशासनिक सेवा में भी इससे जुड़े सवाल सामने आते रहे हैं। जब तक इस विषय को अनिवार्य नहीं बनाया जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा। इसके लिए प्रदेश भर के शिक्षक एकजुट हो चुके हैं। सैकड़ों अध्यापकों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार को सैकड़ों भुगोल शिक्षकों के भविष्य से जुड़े इस निर्णय पर जल्द फैसला करना होगा।