अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों से हटाकर सरकारी स्कूलों में पढ़ाने को हो रहे विवश

कोविड और लॉकडाउन के साइड इफेक्ट्स दिखाई देने शुरू हो गए हैं। लोगों की जेब पर लॉकडाउन ने भारी डाका डाला है। इसी के चलते अभिभावक अब अपने बच्चों को निजी स्कूलों से हटाकर सरकारी स्कूलों में पढ़ाने को विवश हो रहे हैं। सरकारी स्कूलों में छठी से लेकर बारहवीं कक्षा तक अप्रैल माह में दो हजार से अधिक प्राइवेट स्कूलों के छात्र दाखिला ले चुके हैं, जो कि और बढ़ने की उम्मीद भी है, क्योंकि स्कूलों में छात्र बिना लेटफीस के 31 मई तक एडमिशन ले सकते हैं।

बता दें कि हमीरपुर जिला के सरकारी स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों के छात्र धड़ाधड़ करके एडमिशन ले रहे हैं। छात्रों के अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल के बजाय सरकारी स्कूलों में एडमिशन दिलवा रहे हैं, ताकि उन्हें इस बार छात्रों की फीस भरने के लिए स्कूल प्रबंधन के आगे गिड़गड़ाना न पड़े। सरकारी स्कूलों में छठी व नौवीं कक्षा में ही प्राइवेट स्कूलों के ज्यादातर छात्रों ने प्रवेश लिया है। अप्रैल माह तक छठी से बारहवीं कक्षा तक जिला में 20483 छात्रों ने एडमिशन ले ली है।

हालांकि इसमें 11वीं कक्षा शामिल नहीं है। सरकारी स्कूलों में अब तक प्राइवेट स्कूलों के 2166 छात्र-छात्राएं प्रवेश ले चुके हैं। छात्र 31 मई तक बिना लेटफीस के एडमिशन ले सकते हैं। महामारी को देखते हुए छात्रों की एडमिशन डेट अप्रैल से बढ़ाकर मई माह तक कर दी गई है। अब तो दसवीं कक्षा के छात्र भी प्रोमोट कर दिए हैं, अब स्कूलों में जमा एक कक्षा में भी छात्रों की एडमिशन का दौर भी जोर पकड़ेगा, क्योंकि अधिकतर छात्र दसवीं की परीक्षाओं में ही उलझे हुए थे। सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने में स्कूल अध्यापकों व एसएमसी का योगदान है, क्योंकि वे गांव-गांव जाकर पोस्टर के माध्यम से सरकारी स्कूलों में छात्रों को मिल रही सुविधाओं के बारे में लगातार जागरूक कर रहे थे।

केवी में पहली बार सभी सीटें फुल
हमीरपुर जिला मुख्यालय स्थित केंद्रीय विद्यालय हमीरपुर में भी इस बार सभी सीटें फुल हो गई हैं। कई छात्रों को चाहकर भी एडमिशन नहीं मिल पाई है। यह पहला मौका है कि स्कूल की सभी सीटें एडमिशन डेट से पहले ही भर गई हैं। यहां तक कि पहली कक्षा में एक भी सीट इस बार खाली नहीं बची है।