भाजपा के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए राठौर को खासी माथापच्ची करनी होगी

हिमाचल कांग्रेस की गुटबाजी पाट कर कांग्रेस की नई फौज खड़ी करना अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के लिए बड़ी चुनौती होगी। प्रदेश में लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा उपचुनाव के परिणामों से मजबूत हुई भाजपा के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए राठौर को खासी माथापच्ची करनी होगी।

वीरभद्र, सुक्खू, मुकेश, आशा, बाली और कौल सिंह जैसे नेताओं के बीच सामंजस्य बैठाना आसान नहीं है। नई कार्यकारिणी का गठन करने के लिए राठौर को बड़ी परीक्षा देनी पड़ेगी। नई कार्यकारिणी से कुलदीप सिंह राठौर का राजनीतिक कद भी तय होगा।

कुलदीप सिंह राठौर इस मामले को लेकर लगातार पूर्व मुख्यमंत्री से सलाह-मशविरा कर रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू के खिलाफ मुखर वीरभद्र सिंह खुलकर राठौर के समर्थन में आ चुके हैं। छह बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह का प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में अपना वोट बैंक भी है। ऐसे में राठौर के लिए पूर्व मुख्यमंत्री के खेमे को साथ चलाना जरूरी होगा। वीरभद्र सिंह के समर्थकों की अनदेखी राठौर पर भारी पड़ सकती है।

राठौर के खिलाफ कई बार मुखर रहने वाले सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बीते छह साल के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए ब्लाक से लेकर राज्य कार्यकारिणी तक अपनी अलग से एक फौज तैयार की है। इनको नई कार्यकारिणी में सिरे से खारिज करना भी आसान नहीं होगा। इसी तरह मुकेश अग्निहोत्री, आशा कुमारी, जीएस बाली और कौल सिंह का भी अपना-अपना प्रभाव है।

कांग्रेस का प्रदेशस्तरीय नेता बनने के लिए राठौर को इनके समर्थकों को भी नई कार्यकारिणी में अधिमान देना होगा। इसके अलावा राठौर को अपनी पसंद के ऐसे युवा और ऊर्जावान कार्यकर्ता भी पार्टी में शामिल करना जरूरी है जो भाजपा के खिलाफ सड़क पर उतरकर संघर्ष कर सके। कुल मिलाकर आने वाले दो सप्ताह राठौर के लिए चुनौती भरे रहेंगे। राठौर को अपने आज तक के राजनीति अनुभव का प्रयोग करते हाईकमान की कसौटी पर खरा उतरने के लिए दिन रात एक करने होंगे।