बैंकों ने बांटे 32 हजार 950 करोड़ के कर्ज, बैंकर्स समिति की बैठक में खुलासा

हिमाचल प्रदेश राज्य के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक यूको बैंक ने मंगलवार को एसएलबीसी की 160वीं बैठक बुलाई। बैठक की अध्यक्षता एके गोयल, एमडी और सीईओ और प्रबोध सक्सेना, एसीएस वित्त ने की। वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान, हिमाचल प्रदेश में बैंकों ने 27702 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले 32950 करोड़ रुपए के नए ऋण वितरित किए जो कि 119 फीसदी हैं। 31 मार्च, 2021 की स्थिति के अनुसार, बैंकों के पास कुल 141379 करोड़ रुपए की जमा राशि और 57243 करोड़ रुपए की राशि के ऋण हैं, जिसका सीडी अनुपात 42.49 फीसदी है। मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत बैंकों ने वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 2000 के लक्ष्य के मुकाबले 2063 मामलों को मंजूरी दी। केसीसी योजना के तहत 4,69,765 किसानों ने 7426 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्राप्त की और मुद्रा योजना के तहत 195850 लाभार्थियों को 2895 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी गई है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए वार्षिक कार्य योजना विभिन्न योजनाओं के तहत 30 हजार 538 करोड़ का बजट निर्धारित किया, जो विभिन्न योजनाओं के तहत दिया जाएगा। निदेशक, वित्तीय सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय, नई दिल्ली, ए के डोगरा ने चंबा, लाहुल स्पीति और किन्नौर जिले के 56 गांवों में बैंकिंग सुविधाओं की अनुपलब्धता का कड़ा संज्ञान लिया। अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त ने जानना चाहा कि हॉस्पिटेलिटी उद्योग के लिए पिछली योजना असफल क्यों रही व नई योजना कितनी कारगर सिद्ध होगी। इस पर संयोजक बैंक ने बताया कि पिछली योजना देरी से शुरू की गई थी। तब तक बैंक भारत सरकार की योजना के अंतर्गत ऋण दे चुके थे। दूसरी बात कि पुरानी योजना केवल ऋणी इकाइयों पर ही लागू हो रही थी, जबकि नई योजना पूरे पर्यटन वर्ग पर लागू होगी।

जमा-ऋण अनुपात से खुश नहीं

अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त, प्रबोध सक्सेना ने वर्ष 2020-21 के दौरान 42.49 फीसदी जमा-ऋण अनुपात पर असंतोष दिखाया। बैंकों द्वारा यह बताया गया कि इस कोरोना प्र्रभावित वर्ष के दौरान, सभी वाणिज्यिक गतिविधियां ठप हो गई थीं, जिसके परिणामस्वरूप पूरे देश में कम क्रेडिट उठाव हुआ। इसके परिणामस्वरूप सीडी अनुपात में गिरावट आई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि 15 दिनों में तुलनात्मक व विश्लेषणात्मक अध्ययन रिपोर्ट उन्हें सौंपी जाए।