बुरास के फुल बने आजीविका का साधन, स्वयं सहायता समूह माँ काली सुंदरघाट की महिलायों ने शुरु की मुहीम

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के विकास खंड संगड़ाह के जंगल में बुरास के फुल इस  क्षेत्र की महिलाओं के आजीविका का साधन बनता जा रहा हैं। विकास खंड संगड़ाह  की महिलाएं बुरास के फुल से  उत्पाद तैयार करने की बिधि को लगातार अपना रहे है .  सैंज   पंचायत का स्वयं सहायता समूह काली माता सुंदरघाट से जुड़ी महिलाओं ने  बुरास के फुल से जूस व जेम बनाना शुरू कर दिया है ।

महिलायों का कहना है की ये काम हमें पहले पता नही था  पर जब हमें बतया गया की ये कितना फायेदेमंद है तो हमने इसे अपनाने में जरा भी देर नही की .

महिलायों का कहना है की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत  स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने बुरास से तैयार होने वाले जूस, जैम तथा चटनी आदि बनाने संबंधी प्रशिक्षण दिया गया था .

 

गौरतलब है किए गत माह पंचायत समिति अध्यक्ष संगड़ाह मेलाराम शर्मा द्वारा क्षेत्र में सैकड़ों मिट्रिक टन औषधीय फूलों का इस्तेमाल न होने तथा इसे आजीविका से न जोड़ें जाने संबंधी जानकारी ख़बर हिमाचल से प्रकाशित हुई थी। खंड विकास अधिकारी संगड़ाह सुभाष चंद अत्री ने बताया कि संगड़ाह उपमंडल  में एसएचजी से जुड़ी महिलाओं को रोडो प्रोडक्ट संबंधी ट्रेनिंग करवाई थी तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी महिलाओं द्वारा रोडो प्रोजेक्ट्स की बिक्री शुरू की जा चुकी है।

 

क्या कहना है महिलायों का

स्वयं सहायता समूह काली माता सुंदरघाट से जुड़ी महिलाओं का कहना है की हमें ये काम काफी पसंद आ रहा है . उनका कहना है की हमारा जो भी खाली समय होता था उसे हम एस काम में लगा देते है और ये हमारे रोजगार का साधन भी बनता जा रहा है.