बिजली ने दिया 450 करोड़ का झटका, पिछले साल 700 करोड़ की ही बिजली बेच पाई सरकार

बिजली की कमाई में हिमाचल सरकार को पिछले साल कोरोना काल में बड़ा झटका लगा है। पिछले साल 1150 करोड़ के मुकाबले राज्य सरकार अपने हिस्से की मात्र 700 करोड़ रुपए की ही बिजली बेच सकी। कोरोना में एक तरफ जहां बिजली का उत्पादन प्रभावित हुआ, वहीं बाजार में बिजली का दाम भी बहुत कम मिला है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार को हिस्सेदारी की बिजली में नुकसान उठाना पड़ा है। इस साल सरकार ने हिस्सेदारी की बिजली से कमाई का टारगेट एक हजार करोड़ रुपए का रखा है, मगर सूत्र बताते हैं कि जिस तरह का बाजार भाव चल रहा है, उससे यह टारगेट पूरा होता नहीं दिख रहा। पिछले से पिछले साल 1150 करोड़ रुपए की बिजली बेची गई थी, मगर गत वर्ष कोरोना काल के बीच 700 करोड़ की ही बिजली बेची जा सकी। कुछ साल पहले तक हिस्सेदारी की बिजली से प्रदेश सरकार 1400 से 1500 करोड़ रुपए तक की सालाना कमाई करती थी, लेकिन अब उतना ज्यादा फायदा यहां पर नहीं मिल पा रहा है।

बताया जा रहा है कि ज्यादा से ज्यादा दामों में बिजली को बेचने के लिए सरकार अब नए करार कर रही है, जिसने बिजली बिक्री के लिए कंपनियों से आवेदन भी मांगे गए हैं। इनको शॉर्टलिस्ट किया जा रहा है, जिसके बाद इनके माध्यम से बिजली को दूसरे राज्यों को बेचा जाएगा। वर्तमान में भी सरकार के पास कई राज्यों व एजेंसियों के साथ करार हुए हैं, जिनको सप्लाई दी जा रही है। इन दिनों मैदानी क्षेत्रों में बिजली की कमी को पूरा करने के लिए बिजली बोर्ड के साथ सरकार की हिस्से की बिजली की बेची जा रही है, मगर भाव बहुत कम हैं। साढ़े तीन रुपए प्रति यूनिट की लागत से ही बाजार में बिजली बिक रही है। मार्केट में हाइडल पावर का रेट काफी कम चल रहा है, जबकि सौर ऊर्जा से तैयार बिजली का रेट काफी अच्छा मिल रहा है। देखना होगा कि इस बार सरकार कमाई करेगी या नहीं, क्योंकि उसने 1000 करोड़ रुपए की कमाई का टारगेट रखा है। उधर, ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी का कहना है कि टारगेट को पूरा करने के लिए कहा गया है। बाजार भाव पर निर्भर करता है कि कितनी कमाई होगी। (एचडीएम)