फीस में सालाना छह से 10 फीसदी की बढ़ोतरी मांग रहे हिमाचल के निजी स्कूल, निदेशालय को मिले सुझाव

हिमाचल प्रदेश के निजी स्कूलों ने वार्षिक फीस में छह से दस फीसदी की बढ़ोतरी करने की मांग की है। राज्य के बड़े कान्वेंट स्कूलों ने गुणात्मक शिक्षा देने की बात कहते हुए अपनी फीस को जायज ठहराया है। कान्वेंट स्कूलों ने कड़े शब्दों में लिखा है कि सरकारी स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा नहीं मिलने के चलते ही अभिभावक निजी स्कूलों को प्राथमिकता देते हैं। निजी स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं। ऐसे में स्कूल फीस भी उसी स्तर पर तय होती है। अभिभावकों ने जनरल हाउस के माध्यम से फीस तय करने की मांग की है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी हितधारकों से हिमाचल प्रदेश निजी स्कूल (फीस और अन्य मामलों का विनियमन) विधेयक 2021 में आवश्यक बदलाव करने को लेकर तीस जून तक सुझाव देने को कहा था।

निर्धारित अवधि तक प्रदेश भर से मात्र 11 अभिभावकों की ओर से सुझाव दिए गए। निजी स्कूलों की फीस को लेकर हल्ला करने वाले अधिकांश अभिभावकों ने विधेयक में बदलाव करने के लिए अपनी जिम्मेवारी नहीं निभाई है। अब प्रदेश भर से प्राप्त हुए कुल 27 सुझावों के आधार पर उच्च शिक्षा निदेशालय ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। शनिवार को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा शिक्षा सचिव राजीव शर्मा को रिपोर्ट सौंपेंगे। शिक्षा निदेशालय पहुंचे सुझावों में अभिभावक संगठनों ने मनमानी करने वाले निजी स्कूलों पर दस लाख रुपये जुर्माना और दस साल की कैद का प्रावधान करने की मांग की है। हर वर्ष फीस में छह फीसदी की वृद्धि के प्रावधान का विरोध किया है। निजी स्कूलों की ओर से चयनित दुकानों से ही किताबों व वर्दी खरीद की व्यवस्था पर भी रोक लगाने की मांग की गई है।