पावर वीडर बदल रहा है उजडे़ हुए खेतों में खेती की तकदीर  

सिरमौर जिला के विकास खण्ड राजगढ़ की ग्राम पंचायत नेरी कोटली के शाया चबरोन गांव के हर्षित ठाकुर को बैलों के होने के बावजूद भी उजडे़ हुए खेतों में हल लगाने के लिए कठिनाई का सामना करना पड़ता था। उनका कहना है कि जब भी वह बैलों से अपने उजडे़ हुए खेतों में हल लगाने की कोशिश करते थे, तो घनी घास व झाड़ियां उगने व मिटटी सख्त होने के कारण हल नहीं लगा पाते थे। खेतों को खोदने के लिए जरूरत के मुताबिक मजदूर भी नहीं मिलने से परेशान होकर इन खेतों को बंजर ही छोड़ने को मजबूर थे।

इसी दौरान हर्षित ठाकुर ने देखा कि गांव का एक अन्य किसान पावर वीडर से अपनी खेतों में बड़ी आसानी से हल लगा रहा था। पावर वीडर द्वारा बड़ी सुगमता से हल लगाते हुए देख कर उनके मन में भी इस मशीन को लेने की इच्छा हुई। हर्षित ने तुरन्त अपने मोबाइल पर सर्च किया तो मालूम हुआ कि किसानों व बागवानों को उपदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध करवाने के उदेश्य से प्रदेश सरकार ने ’’राज्य कृषि यंत्रीकरण’’ योजना आरम्भ की है। इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा किसानों व बागवानों को पावर वीडर खरीदने के लिए 50 प्रतिशत उपदान अथवा अधिकतम 25 हजार रूपये तक की राशि प्रदान की जा रही है। यह जानकारी हासिल होने पर हर्षित ठाकुर के मन में उजडे़ हुए खेतों में दोबारा से हल जोतने की आस बढ़ी और योजना का लाभ उठाने के लिए वर्ष 2019 में पावर वीडर के लिए आवश्यक दस्तावेजों सहित क्षेत्रीय आलू विकास कृषि कार्यालय राजगढ़ में आवेदन किया। आवेदन करने के उपरान्त हर्षित ठाकुर को पावर वीडर के लिए प्रदेश सरकार की ओर से कृषि विभाग के माध्यम से 25 हजार रूपये उपदान दिया गया।

हर्षित ठाकुर सरकार का धन्यावाद करते हुए कहते हैं कि पहले वे आडू व सेब के बगीचे में घनी घास व झाड़ियां उगने के कारण फसल उगाना तो दूर की बात है, उसमें हल भी नहीं लगा पाते थे। लेकिन अब पावर वीडर लेने के बाद लगभग 20 से 25 बीघा भूमि पर खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि फावडे़ या खुदाली से एक व्यक्ति को खरपतवार निकालने व मिटटी चढ़ाने में बहुत समय लगता है और काफी मेहनत भी करनी पड़ती है, लेकिन पावर वीडर के इस्तेमाल से फसल के अंदर से खरपतवार निकालने तथा मिटटी चढ़ाने का कार्य आसानी से तो होता ही है और समय भी कम लगता है। मशीन छोटी व वजन कम होने की वजह से इसे एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाना और लाना काफी आसान होता है। इस मशीन की मदद से मजदूरी, समय और पैसे तीनों की बचत होती है। उनका कहना है पावर वीडर से खेतों में खेती करने के उपरान्त उनकी आय में भी 2 से 3 गुणा वृद्धि हुई है और उन्हें इस बार लगभग पांच लाख रूपये की आय प्राप्त हुई है।  

हर्षित ठाकुर का कहना है कि प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना से उन्हें भरपूर फायदा हुआ है। किसानों व बागवानों के बरसों से उजड़े हुए खेतों में फिर से हरियाली लाने के लिए यह पावर वीडर किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। फसलों के उत्पादन में बढौतरी होने से उनकी आर्थिकी भी सुदृढ़ हुई है। उन्होंने इस योजना का लाभ किसानों व बागवानों तक पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार और प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का आभार व्यक्त किया है।