पंजाब: अब नई गुटबाजी में फंसी कांग्रेस, क्या बिना ‘कैप्टन’ के संभल पाएंगे हालात?

पंजाब में ऐसा अचानक होगा, अचानक कई गुट सक्रिय हो जाएंगे ऐसा कांग्रेस ने सोचा भी नहीं था। चरणजीत सिंह चन्नी के पंजाब का मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता इसे एक बड़ी सोशल इंजीनियरिंग के रूप में देख रहे थे। हालांकि भक्त चरण दास समेत कई नेताओं का अब भी मानना है कि इसका फायदा कांग्रेस को कई राज्यों में होगा। लेकिन सिद्धू के इस्तीफे ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। पंजाब में कांग्रेस बड़ी गुटबाजी का शिकार हो गई है। एक गुट पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का है। दूसरा पंजाब कांग्रेस प्रधान से इस्तीफा देने वाले सिद्धू का और तीसरा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का भी गुट खड़ा हो रहा है।

लुधियाना से कांग्रेसी दंपती डा. अरुण धवन और डा. सविता धवन के अनुसार फिलहाल खलनायक के रूप में सिद्धू हैं। चन्नी के बारे में यही राय फैल रही है कि वह रबर स्टांप मुख्यमंत्री होकर काम नहीं करना चाहते। कांग्रेस हाई कमान को विश्वास में लेकर चन्नी स्वतंत्र फैसले ले रहे हैं और कांग्रेस के प्रधान सिद्धू ने दबाव बनाने के लिए इस्तीफा देने की चाल चली है।

यह सिर्फ क्रिकेट नहीं है: सुनील जाखड़
पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ शांत, संयत स्वभाव के सुलझे नेता हैं। सिद्धू के इस्तीफा देने के बाद सुनील जाखड़ की प्रतिक्रिया पर गौर किया जाना चाहिए। जाखड़ प्रतिक्रिया में कहते हैं कि यह सिर्फ क्रिकेट नहीं है। इस पूरे प्रकरण में जिस बात से समझौता किया गया, वह है कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व पर भरोसा। कोई भी भरोसे के इस उल्लंघन को सही नहीं ठहरा सकता। जाखड़ ने अपनी इस प्रतिक्रिया में सिद्धू पर खुला हमला बोला है। यह प्रतिक्रिया सिद्धू की राजनीतिक समझ, संतुलन, विश्वास कायम रखने की क्षमता के साथ इसी तरह के सवाल शीर्ष नेतृत्व से भी कर रही है। कुल मिलाकर इसमें खलनायक सिद्धू तो मजाक का पात्र कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व बन रहा है।

कैप्टन की पवेलियन से भी हो रही है कप्तानी
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मैदान से खुद को रिटायर घोषित करके पैवेलियन से बल्लेबाजी तेज कर रखी है। वह कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और नवजोत सिंह सिद्धू को भी अपने मुखर बयानों से डरा रहे हैं। मजे की बात है कि कैप्टन के इस तरह मुखर होने में कांग्रेस के पंजाब के कुछ सांसद, विधायक, कार्यकर्ता और कैप्टन सरकार के समय में मंत्री रहे कुछ चेहरे साथ हैं। एक सांसद तो यहां तक कहते हैं कि एक तरफ कैप्टन और दूसरी तरफ बची हुई कांग्रेस। सांसद का कहना है कि यदि कैप्टन नई पार्टी बना भी लें तो यह सही है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें बहुमत नहीं मिलेगा, लेकिन यह भी सही है कि सत्ता कांग्रेस के हाथ से फिसल कर किसी और राजनीतिक दल के पास चली जाएगी। सूत्र का कहना है कि इसे नवजोत सिंह सिद्धू, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, कांग्रेस पार्टी के प्रभारी हरीश रावत और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी समझ रहा है।

बना बनाया खेल बिगड़ गया
पंजाब कांग्रेस की पूर्व प्रभारी भी मान रही हैं कि पंजाब में कांग्रेस का बना बनाया खेल बिगड़ गया है। अब यह नहीं कहा जा सकता है कि एक साल के भीतर कैसे सबकुछ ठीक हो सकेगा। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले नेताओं में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि इस समय क्या बोलें? सही बात तो यह है कि कुछ भी बोलने लायक स्थिति नहीं है? हम केवल इतना कह सकते हैं कि पार्टी को पहले गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए। हमारा विरोधी दल भी मजाक उड़ा रहे हैं। यह स्थिति भी हमने, हमारे नेताओं ने पैदा की है। सूत्र का कहना है कि पिछले कुछ साल में कुछ राज्यों में हुई घटनाओं से भी हम सबक नहीं ले रहे हैं। सूत्र का कहना है कि वह सच्चे कांग्रेसी हैं और जो भी बोलना होगा, कांग्रेस के मंच से अपनी राय रखेंगे।