नाहन शहर के नीचे से निकलेगी सुरंग, केंद्र के भूतल परिवहन-सडक़ मंत्रालय से मांगे कंसल्टेंसी टैंडर

जिला सिरमौर के साथ-साथ जिला मुख्यालय व प्रदेश के लिए खुशी की खबर है। सिरमौर जिला के मुख्यालय नाहन शहर के नीचे सुरंग बनेगी और इस ऐतिहासिक शहर को ट्रैफिक के बोझ से राहत मिलेगी। इस बड़ी परियोजना से नाहन शहर के लोगों के साथ-साथ उन लोगों के लिए राहत की खबर है, जो जिला मुख्यालय नाहन से होते हुए देहरादून, चंडीगढ़, शिमला, सोलन, श्रीरेणुकाजी या प्रदेश के अन्य हिस्सों में सफर करते हैं। यही नहीं, नाहन शहर को निकट भविष्य में बड़े वाहनों की आवाजाही व भारी जाम से भी निजात मिल सकती है। नाहन शहर के नीचे सुरंग के निर्माण के लिए सर्वे को लेकर केंद्र सरकार के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा कंसल्टेंसी कंपनियों से टैंडर आमंत्रित किए गए हैं। केंद्रीय परिवहन व भूत्तल मंत्रालय भारत सरकार ने हिमाचल के लोक निर्माण विभाग के एनएच विंग के माध्यम से सुरंग के निर्माण को लेकर परियोजना प्रबंधन परामर्श के टैंडर आमंत्रित किए हैं। इस कार्य पर पांच करोड़ की राशि खर्च होगी।

कंसल्टेंसी सेवा देने वाली कंपनी को चार महीने के भीतर डीपीआर भी बनानी होगी। इस सुरंग के निर्माण को पूरा करने का लक्ष्य 24 महीने होगा। साथ ही 10 साल की मेंटेनेंस भी शामिल की गई है। कंसल्टेंसी देने वाली कंपनी सुरंग के निर्माण से पूर्व होने वाली गतिविधियों का आकलन भी करेगी। जानकारी के मुताबिक, इस डबल लेन टनल की दूरी करीब 1400 मीटर मानी जा रही है। राज्य के नेशनल हाई-वे विंग के चीफ इंजीनियर ने इस कार्य को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कंसल्टेंसी कंपनियां चार अक्तूबर, 2021 तक इस कार्य के लिए आवेदन कर सकेंगी। छह अक्तूबर, 2021 को टैंडर खोले जाएंगे। गौर हो कि नाहन शहर में ट्रैफिक के जाम व यातायात के बोझ कम करने को लेकर लंबे समय से मांग उठ रही है। बाईपास का मुद्दा भी सेना क्षेत्र व रिजर्व फोरेस्ट के अधिक हिस्से के होने के कारण सिरे नहीं चढ़ पाया है। मामले को लेकर गत दिनों मोहल्ला गोबिंदगढ़ से बनोग तक लोगों ने एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था। इसमें यह मांग की गई थी कि हाई-वे को शहर के बीचोंबीच से न निकाला जाए। जानकारों की मानें, तो सुरंग के निर्माण के अलावा कोई विकल्प भी नजर नहीं आ रहा था। बताया जा रहा है कि कंसल्टेंसी कंपनी ने तमाम पहलुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपनी है। उसके बाद यदि केंद्र सरकार इस परियोजना को हरी झंडी दे देती है, तो उसके बाद भी सुरंग के निर्माण में कम से कम पांच साल से अधिक का समय लग सकता है। (एचडीएम)

1400 मीटर लंबी सुरंग दो साल में बनानी होगी

प्रस्तावित डबल लेन टनल की लंबाई करीब 1400 मीटर मानी जा रही है। कंसल्टेंसी सेवा देने वाली कंपनी को चार महीने के भीतर डीपीआर भी बनानी होगी। इस सुरंग के निर्माण को पूरा करने का लक्ष्य 24 महीने होगा। साथ ही 10 साल की मेंटेनेंस भी शामिल की गई है।