नकली दवाओं के कारोबार पर करारा प्रहार, राज्य सरकार ने बनाई पांच समितियां

प्रदेश में नकली दवाइयों के कारोबार पर वार को सरकार तैयार है। सरकार ने एक रणनीति बनाई है जिसके तहत अब नकली दवाइयां बनाने वाली कंपनियों पर नकेल कसी जाएगी। एक विशेष एसओपी भी तैयार की गई है, वहीं फार्मा कंपनियों पर छापामारी के लिए पांच कमेटियों का गठन किया गया है। वहीं एसओपी में पुलिस के अधिकारी भी साथ में जिम्मेदार बनाए गए हैं। सिरमौर जिला में नकली दवाओं के उत्पादन का भंडा फूटने के बाद सरकार एक्शन में आई है। इन दोनों कंपनियों को नोटिस दिया गया था जिनका जवाब सरकार को आ गया है। इस जवाब को देखने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। सूत्रों के अनुसार इन कंपनियों का लाइसेंस रद हो सकता है। उधर, दूसरे दवा कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग ने पांच अलग-अलग कमेटियों का गठन किया जो फार्मा कंपनियों पर छापामारी करेंगी। देखा जाएगा कि कहां-कहां पर ऐसी दवाइयां बन रही हैं।

पहली टीम में डा. मनीष कपूर डिप्टी ड्रग कंट्रोलर बद्दी, अनूप शर्मा ड्रग इंस्पेक्टर बद्दी, लवली ठाकुर ड्रग इंस्पेक्टर बद्दी, डा.कुशाल कुमार ड्रग इंस्पेक्टर बद्दी तथा मिस प्रोमिला ड्रग इंस्पेक्टर बद्दी को रखा गया है। दूसरी टीम में गरिमा शर्मा सहायक ड्रग कंट्रोलर बद्दी, पंकज ड्रग इंस्पेक्टर बद्दी, प्रीति शर्मा ड्रग इंस्पेक्टर सोलन, हरीश ड्रग इंस्पेक्टर बद्दी को रखा गया है। तीसरी टीम में सन्नी कौशल सहायक ड्रग कंट्रोलर नाहन, नरेंद्र ठाकुर ड्रग इंस्पेक्टर बद्दी, ललित शालटा ड्रग इंस्पेक्टर नाहन, रजत ड्रग इंस्पेक्टर बद्दी तथा भूमिका ड्रग इंस्पेक्टर पांवटा साहिब को रखा है। चौथी टीम में आशीष रैणा सहायक ड्रग कंट्रोलर धर्मशाला, पियार चंद ड्रग इंस्पेक्टर नूरपुर, विकास ठाकुर ड्रग इंस्पेक्टर ऊना,  चिराग ड्रग इंस्पेक्टर धर्मशाला, पंकज ड्रग इंस्पेक्टर ऊना को रखा गया है। पांचवीं टीम में डा.कमलेश नायक सहायक ड्रग कंट्रोलर बद्दी के अलावा बसंत मित्तल ड्रग इंस्पेक्टर बद्दी, अभिषेक ड्रग इंस्पेक्टर बद्दी तथा सुप्रिया शर्मा ड्रग इंस्पेक्टर बद्दी को रखा गया है। इनको सभी फार्मा कंपनियों में छापामारी और धरपकड़ के लिए कहा गया है। (एचडीएम)

उत्पादन के बाद ड्रग कंट्रोलर को देनी होगी खेप की जानकारी

एसओपी के तहत फार्मा कंपनियों को दवा उत्पादन के बाद उस खेप की पूरी जानकारी देनी होगी। यह जानकारी ड्रग कंट्रोलर के साथ संबंधित क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक को भी होगी, इससे पता रहेगा कि दवाई कहां पर बनी और कहां के लिए गई है जिसकी पूरी जानकारी रखी जाएगी। इसके लिए एसओपी में पूरे प्रावधान रखे गए हैं।