देश में कोविड मरीजो की संख्‍या निरंतर हो रही कमी: स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कहा है कि देश में कोविड मरीजो की संख्‍या निरंतर कम हो रही है। पिछले 22 दिन में संक्रमण से स्‍वस्‍थ होने की दर में और सुधार हुआ है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव लव अग्रवाल ने संवाददाताओं को बताया कि इस समय कोविड मरीजों की संख्‍या कुल संक्रमित लोगों की दस दशमलव एक-सात प्रतिशत है, जबकि तीन मई को यह 17 दशमलव एक-तीन प्रतिशत थी। इस अवधि में संक्रमण से स्‍वस्‍थ होने की दर 81 दशमलव सात प्रतिशत से बढ़कर 88 दशमलव सात प्रतिशत हो गई है। उन्‍होंने बताया कि पिछले 14 दिनों में कोविड मरीजों की संख्‍या दस लाख घट गई। अब 27 लाख 20 हजार मरीजों का उपचार चल रहा है।

अग्रवाल ने कहा कि देश के 27 राज्‍यों में रोजाना स्‍वस्‍थ हो रहे लोगों की संख्‍या दैनिक संक्रमित लोगों से अधिक है। उन्‍होंने कहा कि रोजाना सौ से अधिक संक्रमित लोगों वाले जि़लों की संख्‍या पांच सौ 31 से घटकर चार सौ 31 रह गई है। श्री अग्रवाल ने कहा कि पिछले 15 सप्‍ताह में कोविड जांच की संख्‍या ढाई गुना से ज्‍यादा बढ़ गई। कल अब तक की सबसे अधिक 21 लाख 23 हजार कोविड जांच की गई।

नई दिल्‍ली में एम्‍स के निदेशक डॉक्‍टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि म्‍यूकोरमाइकोसिस के बारे में बात करते समय ब्‍लैक फंगस नाम का इस्‍तेमाल करना बेहतर नहीं है क्‍योंकि अत्‍यधिक भ्रम हो सकता है जिससे बचा जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि ब्‍लैक फंगस अलग परिवार का है और यह शब्‍द व्‍हाइट फंगल कॉलोनीज की कल्‍चर में ब्‍लैक डॉट की मौजूदगी के कारण होने वाले म्‍यूकोरमाइकोसिस से संबंधित है। डॉक्‍टर गुलेरिया ने कहा कि कोविड मरीजों में पाया गया फंगल संक्रमण ज्‍यादातर म्‍यूकोरमाइकोसिस है। उन्‍होंने कहा कि यह कोविड की तरह संचारी रोग नहीं है। उन्‍होंने कहा कि इस तरह के फंगल संक्रमण से प्रभावित 90 से 95 प्रतिशत रोगी मधुमेह से पीडि़त होते हैं या उन्‍होंने अधिक मात्रा में स्‍टेरॉयड लिए होते हैं। डॉक्‍टर गुलेरिया ने कहा कि अनेक कोविड रोगियों का उपचार घर में चल रहा है और जो ऑक्‍सीजन थैरेपी नहीं ले रहे हैं उनमें भी म्‍यूकोरमाइकोसिस का संक्रमण पाया गया है। इसलिए ऑक्‍सीजन थैरेपी और इस संक्रमण के बीच कोई निश्चित संबंध नहीं है।

 डॉक्‍टर गुलेरिया ने कहा कि इस समय कोविड से स्‍वस्‍थ होने की दर बढ़ रही है इसलिए संक्रमण से स्‍वस्‍थ लोगों के प्रबंधन के लिए विशेष क्‍लीनिक बनाने की आवश्‍यकता है जहां कोविड से स्‍वस्‍थ होने के बाद कुछ सप्‍ताह तक उनके लक्षणों पर नज़र रखी जा सके। एक प्रश्‍न के उत्‍तर में डॉक्‍टर गुलेरिया ने कहा कि ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि कोविड की तीसरी लहर में बच्‍चे अधिक प्रभावित होंगे।