देश अपने वैज्ञानिकों के हर प्रयास के साथ मज़बूती से खड़ा है: पीएम

  • जिस परिणाम की उम्मीद चंद्रयान-2 से पूरे देश की जुड़ गईं थी वह कुछ मिनटों से चूक गई। ऐसे में प्रधानमंत्री ने चंद्रयान-2 से जुड़े वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया। उन्होने भरोसा दिलाया की देश अपने वैज्ञानिकों के हर एक प्रयास के साथ मज़बूती से खड़ा है। साथ ही चंद्रमा तक पहुंचने की इच्छा शक्ति और प्रबल हो गई है.

    प्रधानमंत्री का चंद्रयान-2 से जुड़ी टीम को हौसला देना, एक-एक प्रयास को सराहना, ज्ञान की खोज में विज्ञान को सम्मानित करना। वैज्ञानिकों के बीच एक नई ऊर्जा का संचार करना। इसरो अध्यक्ष के साथ एक भावुक पल साझा करना। मुश्किलों से, रूकावटों से, संघर्षों से दामन छुड़ाकर कुछ नया करने का जज़्बा ही तो है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिकों के कुछ नए आविष्कार, नई टेक्नोलॉजी के लिए प्रेरित करती है और इसी से हमारी आगे की सफलता तय होती हैं। ज्ञान का अगर सबसे बड़ा शिक्षक कोई है तो वो विज्ञान है। इसरो के मिशन कंट्रोल सेंटर से प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, विज्ञान में विफलता नहीं होती, केवल प्रयोग और प्रयास होते हैं और भारत को अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम पर गर्व है।

    ये वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों और कुशल तकनीक के लिए एक बेहद ही मुश्किल पल था। चांद की सतह छूने से ठीक 2 किमी. तक सभी कुछ सामान्य था लेकिन लैंडर विक्रम का आख़िरी क्षणों में ज़मीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी इसरो का सर्वश्रेष्ठ आना बाक़ी है। उन्होने कहा कि भारत के वैज्ञानिकों ने हमेशा राष्ट्रप्रगति की दिशा में काम किया है और रूकावटें में भी एक नई सुबह की इबारत लिखी है।