दुर्लभ जेनेटिक रोग: पत्थर जैसा हो रहा पांच माह की बच्ची का शरीर

ब्रिटेन में पांच महीने की बच्ची लेक्सी रॉबिन्स का शरीर दुर्लभ बीमारी के कारण पत्थर जैसा हो रहा है। बच्ची की स्थिति देख, माता-पिता के साथ डॉक्टर भी हैरान हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्ची को ये तकलीफ जेनेटिक डिसऑर्डर फाइब्रोडिस प्लेजिया ऑसिफिकन्स प्रोग्रोसिवा (एफओपी) के कारण हुई है, जो एक दुर्लभ और लाइलाज बीमारी है।

ऐसे मामले बीस लाख लोगों में से सिर्फ एक में ही मिलते हैं। बच्ची को देखने वाले चिकित्सकों का कहना है कि तीस साल के करियर में उन्होंने ये पहला केस देखा है। हालांकि, वर्ष 2014 में एसजीपीजीआई, लखनऊ ने भी ऐसे तीन मामलों की पुष्टि की थी। ब्राजील में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।

लेक्सी के शरीर में मिला एसीआर1 जीन है बीमारी का कारण
लेक्सी के पिता एलेक्स और मां डेव के कहने पर डॉक्टरों ने एक्स-रे जांच के बाद जेनेटिक टेस्ट के लिए सैंपल लॉस एंजिल्स भेजा। 14 जून को रिपोर्ट आई, तो लेक्सी के शरीर में एसीआर 1 जीन मिला, जो दुर्लभ रोग का कारण है। विशेषज्ञों को बीमारी का कारण पता नहीं है। हालांकि, अगले दो से तीन साल में इलाज मिल जाने की उम्मीद है।

अंगूठे समान्य नहीं, हरकत भी कम
एलेक्स व डेव ने बताया कि 31 जनवरी को लेक्सी का जन्म हुआ था। उसके अंगूठे सामान्य नहीं थे, हरकत भी कम थी। डॉक्टरों ने एक्स-रे जांच की तो पाया कि बच्ची के जोड़ों में दिक्कत है। अंगूठे में डबल जॉइंट हैं। डॉक्टरों ने बताया, लेक्सी को सिंड्रोम की दिक्कत है, जिससे वे चल नहीं सकेगी।

कोई टीका तक नहीं लग सकता
बच्ची को हल्की भी चोट लगने पर गंभीर तकलीफ हो सकती है। दुर्लभ रोग के कारण इंजेक्शन या टीका नहीं लग सकता है।
शरीर कठोर होने से बच्ची के दांत संबंधी उपचार संभव नहीं है।
हल्की चोट पर सूजन से हड्डियां और बढ़ेंगी। चलना मुश्कल होगा। वह कभी मां नहीं बन सकेगी, दर्द व जोड़ परेशान करेंगे।
शरीर और गर्दन की हड्डियां बढ़ने से 50 फीसदी बहरेपन का खतरा होगा।
यूपी में भी मिल रहे ऐसे मरीज
एसजीपीजीआई, लखनऊ के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की प्रो. शुभा फड़के ने बताया कि वर्ष 2014 में तीन केस रिपोर्ट किए गए थे। अभी भी डेढ़ से दो साल में एक केस रिपोर्ट होता है। पीड़ित मरीज की जीवन प्रत्याशा कम होती है। रोगी की तकलीफ समय के साथ बढ़ती जाती है।

वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइसेज के जीन विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं कि एफओसी से ग्रसित व्यक्ति की जान बचाना मुश्कलि होता है क्योंकि इसमें हड्डियां कड़ी हो जाती हैं।