जम्मू-कश्मीर : इस बार भी नहीं होगी अमरनाथ यात्रा, आरती का होगा सीधा प्रसारण

अमरनाथ यात्रा इस बार भी नहीं होगी। पिछले साल की तरह छड़ी यात्रा के साथ केवल पारंपरिक पूजन ही होगा। हालांकि, पवित्र गुफा से इस बार भी बाबा बर्फानी की आरती का प्रसारण किया जाएगा। कोरोना संक्रमण को देखते हुए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने यात्रा न कराने का सैद्धांतिक फैसला किया है। आम लोगों की पहुंच से बाहर होने के चलते हेलिकॉप्टर से यात्रा का प्रस्ताव भी फिलहाल खारिज कर दिया गया है।

श्राइन बोर्ड से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार कोरोना संक्रमण को देखते हुए अमरनाथ यात्रा न कराने का सैद्धांतिक तौर पर फैसला ले लिया गया है। हालांकि, सभी पारंपरिक पूजन पहले ही की तरह होंगे। छड़ी निकलेगी और ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पूजन भी होगा। इस साल श्राइन बोर्ड ने 28 जून से अमरनाथ यात्रा शुरू कराने का फैसला किया था। पहले दिन उप राज्यपाल एवं अन्य लोग बाबा बर्फानी की पूजा अर्चना करेंगे।

सूत्रों ने बताया कि बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस बार हेलिकॉप्टर सेवा श्रीनगर से ही शुरू किए जाने का विकल्प तलाशा जा रहा था। इसके लिए निविदाएं भी आमंत्रित की गई थीं। इसके लिए 31 मई तक तिथि बढ़ाई गई। इच्छुक कंपनियों का किराया अधिक होने के चलते इस प्रस्ताव को अब खारिज कर दिया गया है। बोर्ड प्रशासन ने बाबा के दर से सुबह-शाम की आरती के लाइव प्रसारण के लिए करार कर लिया है। नियमित रूप से पवित्र गुफा से आरती का प्रसारण होगा। बाबा भोले के  भक्त देशभर से मां वैष्णो की तरह आरती का लाइव प्रसारण देख सकेंगे।

उधर, श्राइन बोर्ड के एक जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कि इस बार अमरनाथ यात्रा न कराने का फैसला कर लिया गया है। चूंकि, अभी कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा है। इस महीने के आखिर तक संक्रमण दर शून्य प्रतिशत तक होने की उम्मीद है। हवाई यात्रा का विकल्प भी काफी महंगा है। इस वजह से वह भी आम श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी नहीं होगा। इन सब वजहों से यात्रा न कराने का निर्णय किया गया है। इस सब के बावजूद गृह मंत्रालय ने यात्रा कराने के लिए कहा तो प्रशासन इसके लिए पूरी तरह तैयार है।

बोर्ड ने युद्धस्तर पर शुरू की थीं तैयारियां
इस बार बोर्ड ने युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू की थीं। उप राज्यपाल और श्राइन बोर्ड के सीईओ की अध्यक्षता में कई बैठकें हो चुकी थीं। अखाड़ा परिषद को भी न्योता देने का फैसला किया गया था। उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बार छह लाख श्रद्धालु पहुंचेंगे। ऑनलाइन यात्रा पंजीकरण भी शुरू किया गया था, लेकिन अप्रैल में संक्रमण बढ़ने पर इसे रोकना पड़ा। उधर, अब तक लंगर समितियों को भी अनुमति नहीं दी गई है। लंगर समितियों के संगठन साबलो ने पिछले दिनों एलजी प्रशासन से यात्रा पर जल्द फैसला लेने और समितियों को अनुमति देने का आग्रह किया था।

पूर्ण आकार में हैं बाबा बर्फानी
बाबा बर्फानी इस साल पूर्ण आकार में है। पवित्र गुफा से हाल के दिनों में वायरल फोटो और वीडियो में बाबा अमरनाथ पूर्ण आकार में दिख रहे हैं। गुफा के आस पास अभी भी बर्फ जमा है।

पहलगाम का ट्रांजिट कैंप पड़ा सूना
पहलगाम में अमरनाथ यात्रियों का ट्रांजिट कैंप और सुरक्षा चेक प्वाइंट बिल्कुल सूने पड़े हैं। यहां किसी प्रकार की तैयारी नहीं दिख रही है। न तो रंगरोगन हो रहा है और न ही साफ सफाई। हालांकि, पहलगाम विकास प्राधिकरण (पीडीए) के सूत्रों ने बताया कि प्राधिकरण की ओर से पहलगाम ट्रैक से बर्फ हटाई जा रही है। यह इस वजह से भी है कि यात्रा भले ही न हो, लेकिन छड़ी तो इसी रास्ते से जाएगी। इसलिए ट्रैक की सफाई जरूरी है। सूत्रों का कहना है कि यदि अचानक ही यात्रा शुरू करने की योजना बन गई तो ट्रैक से बर्फ हटाने में काफी मुश्किलें आएंगी। इस वजह से भी सफाई शुरू करना जरूरी है।